आचार्य श्री विमल सागर महाराज की जन्म जयंती महोत्सव के साथ पट्ट गणिनी आर्यिका विमलप्रभा माताजी का गणिनी पदारोहण दिवस भव्यता के साथ मनाया गया आचार्य विमलसागर महाराज मे पाषाण को मूर्ति बनाने की कला थी  विमलप्रभा माताजी

धर्म

आचार्य श्री विमल सागर महाराज की जन्म जयंती महोत्सव के साथ पट्ट गणिनी आर्यिका विमलप्रभा माताजी का गणिनी पदारोहण दिवस भव्यता के साथ मनाया गया आचार्य विमलसागर महाराज मे पाषाण को मूर्ति बनाने की कला थी  विमलप्रभा माताजी
रामगंजमंडी
रामगंजमंडी नगर मे पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विमलप्रभा माताजी एवम संघस्थ आर्यिका 105 विजयप्रभा माताजी क्षुल्लिका 105 विनीतप्रभा माताजी क्षुल्लिका 105
सुमैत्री श्री माताजी सानिध्य मे आचार्य श्री 108 विमलसागर महाराज का जन्म जयंती महोत्सव एवम पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विमलप्रभा माताजी का गणिनी पदारोहण दिवस भव्यता के साथ मनाया गया आयोजन के क्रम मे सर्वप्रथम आयोजन की शुरुआत मंगलाचरण से हुयी जो श्रीमती साधना पहाड़िया किरण सिंघल पूजा सिंघल द्वारा किया गया इसी क्रम मे श्रीमति अंजलि जैन द्वारा आचार्य श्री विमलसागर महाराज के प्रति भाव भीनी विनयांजलि प्रस्तुत की आयोजन के क्रम मे आचार्य श्रीविमल सागर महाराज के चित्र का अनावरण एवम दीप प्रज्वलन समाज दिलीप विनायका उपाध्यक्ष चेतन बागडिया नरेश चांदवाड भूपेंद्र सावला रमेश विनायका पदम लुहाडिया आदि ने किया
आचार्य गुरुवर विमल सागर महाराज एवम पट्ट गणिनी आर्यिका विमलप्रभा माताजी के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए क्षुल्लिका

 

 

105 सुमैत्री श्री माताजी ने कहा की आचार्य श्री विमलसागर महाराज की कृपा साक्षात् मेरे साथ है उनकी महिमा छोटी मोटी नहीं थी उनके आशीष से मिटटी भी सोना हो जाती थी उन्होने गुरु माँ के प्रति भी भाव प्रकट किए इस अवसर पर क्षुल्लिका


105 विनीतप्रभा माताजी ने भी अपने भाव प्रकट किए और कहा की आचार्य श्री विमल सागर महाराज मे अलोकिक ऊर्जा थी। विमलप्रभा माताजी अलोकिक है वे अनुशासन प्रिय है विजयप्रभा माताजी ने आचार्य श्री विमलसागर महाराज के प्रति कहा की अमूल्य रत्न थे माता कटोरी और पिता बिहारीलाल नहीं होते तो जगत को यह रत्न नहीं मिलता ये गुरु चरण जहा धरे जग मे तीरथ होय आज के पावन दिन ही गुरु माँ का गणिनी पद का संस्कार हुआ इन मांगलिक पलो मे आचार्य श्री विमल सागर महाराज एवम माताजी की विशेष अष्ट द्रव्यों का थाल सजाकर पूजन भक्ति भाव विभोर होकर की गई एवम गुरु माँ के चरणों का पाद प्रक्षालन कर उन्हे शास्त्र भेट किया गया पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विमलप्रभा माताजी ने अपने भाव प्रकट करते हुए कहा की विमल सागर महाराज जेसे रत्न को हम नहीं भूल सकते सूर्य एक होता है लेकिन कोसमा मे एक अलोकिक सूर्य उदित हुआ आचार्य विमलसागर महाराज मे पाषाण को मूर्ति बनाने की कला थी आचार्य विमलसागर महाराज मेरे लिए प्रारभिक छाव है और विजयमति माताजी ने जीवन वृतांत बताया पूजन गायन अनिता जैन ने किया
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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