पुरुषों को धर्म से दूर रहने का भ्रम छोड़ना होगा, समता और पुरुषार्थ ही सफल जीवन की कुंजी : मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

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पुरुषों को धर्म से दूर रहने का भ्रम छोड़ना होगा, समता और पुरुषार्थ ही सफल जीवन की कुंजी : मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज

नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण, विवाह संस्कार में शास्त्रीय मर्यादाओं के पालन का किया आह्वान

मधुबन।
राष्ट्रसंत मुनिश्री 108 प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि धर्म-साधना किसी एक वर्ग या केवल महिलाओं का विषय नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के आत्मकल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है। पुरुषों को यह भ्रम कभी नहीं पालना चाहिए कि धर्म केवल महिलाओं के लिए है। धर्म, समता, विश्वास और पुरुषार्थ का समन्वय ही जीवन को सफल, शांत और सार्थक बनाता है।

 

 

गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि गुणायतन में आयोजित दैनिक शंका समाधान कार्यक्रम में देश के विभिन्न महानगरों और नगरों से आए श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश-विदेश से ऑनलाइन जुड़े हजारों जिज्ञासुओं के धार्मिक, सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन से जुड़े प्रश्नों का मुनि श्री ने अत्यंत सरल, तार्किक और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया।

 

 

मुनि श्री ने कहा कि नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने में परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। माता-पिता के साथ दादा-दादी भी बच्चों के जीवन में नैतिक मूल्यों और धार्मिक संस्कारों का बीजारोपण कर सकते हैं। यदि परिवार में धार्मिक वातावरण होगा तो समाज भी संस्कारित और सुदृढ़ बनेगा।

 

 

उन्होंने कहा कि सुख और शांति का सबसे सरल मार्ग समता है। सुख मिलने पर आसक्त होना और दुःख आने पर विचलित होना उचित नहीं है। इष्ट और अनिष्ट दोनों परिस्थितियों में मन को स्थिर रखना ही वास्तविक आध्यात्मिक साधना है।

 

 

विश्वास के विषय में मुनि श्री ने कहा कि अधूरी जानकारी, पूर्वाग्रह और दूसरों की बातों के आधार पर निर्णय लेना विश्वास को कमजोर करता है। किसी भी व्यक्ति के बारे में बिना सत्य जाने धारणा नहीं बनानी चाहिए। सकारात्मक सोच और समग्र चिंतन ही स्वस्थ एवं मजबूत संबंधों की नींव है।

विवाह संस्कार पर उन्होंने कहा कि विवाह भगवान की साक्षी में संपन्न होने वाला एक पवित्र धार्मिक संस्कार है। तीर्थों और मंदिरों में विवाह के नाम पर अशास्त्रीय आयोजन, रात्रिकालीन कार्यक्रम, प्री-वेडिंग शूट तथा फिल्मी परंपराओं से बचते हुए शास्त्रीय मर्यादाओं के अनुरूप ही विवाह संपन्न किए जाने चाहिए।

 

 

समाज सेवा के संदर्भ में मुनि श्री ने महिला संगठनों का आह्वान किया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाएँ। साथ ही पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की सही एवं तथ्यपूर्ण जानकारी पहुँचाना भी श्रेष्ठ समाज सेवा है।

 

 

भाग्य और पुण्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भाग्य पूर्वकृत कर्मों का परिणाम है, जबकि पुण्य उसका उज्ज्वल पक्ष है। यदि भविष्य को श्रेष्ठ बनाना है तो वर्तमान में शुभ पुरुषार्थ और पुण्य का संचय करना आवश्यक है। अतीत के पुण्यों से अधिक वर्तमान के सद्कर्म ही आने वाले जीवन का श्रेष्ठ भाग्य निर्मित करते हैं।

शंका समाधान कार्यक्रम का संचालन मुनिश्री 108 संधान सागर महाराज ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जबकि देश-विदेश से ऑनलाइन जुड़े हजारों श्रद्धालुओं ने भी मुनि श्री के प्रेरक मार्गदर्शन, जीवनोपयोगी प्रसंगों और सत्य घटनाओं पर आधारित उदाहरणों के माध्यम से धर्म, संस्कार, समता और पुरुषार्थ का अमूल्य संदेश प्राप्त किया।

— संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी। 9929747312

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