आनन्द एवं अरुण सलेहा ने प्राप्त किया गुरु माँ का मंगल आशीर्वाद
गुंसी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ , गुंसी राजस्थान की धरा को पावन एवं पवित्र करने वाली परम पूज्या भारत गौरव गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी की प्रेरणा से 108 फीट उत्तुंग कलशाकार सहस्रकूट जिनालय का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है ।
माताजी ससंघ सान्निध्य में चल रहे 1008 दिवसीय सहस्रनाम के अखण्ड मंगल पाठ में भक्ति का आनन्द सलेहा मध्यप्रदेश के भक्तों ने लिया । तत्पश्चात अभिषेक , शांतिधारा कर गुरु माँ का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया ।




प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्य गुरु माँ ने कहा कि – भक्ति में दो बातें मुख्य है, एक तो भीतरी एकाग्रता और दूसरी निर्लोभ वृत्ति । भीतरी एकाग्रता से की गई भक्ति वह शक्ति प्रदान करती है, जिससे भक्त संकटों का सामना कर सकता है और कष्टों से छूट सकता हैं। निर्लोभ वृत्ति से अचिन्त्य फल की प्राप्ति होती हैं। भक्ति में एकाग्रता ऐसी हो कि आराध्य के अलावा और कोई न दिखे, मन के सारे विकार शान्त हो जाएँ। तीर्थकर प्रकृति के बन्ध हेतु ऐसी ही भक्ति की आवश्यकता होती है।
माताजी के ससंघ सान्निध्य में वर्ष 2023 के अंतिम दिन दोपहर में श्री 1008 शांतिनाथ महामण्डल विधान का आयोजन श्री कजोड़मल जी
झिलाय वाले परिवार द्वारा सम्पन्न होगा ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
