वीर कर्म योद्धा आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज दक्षिण आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज दक्षिण की संलेखना पूर्वक समाधि।
कुथलगिरी
प.पू. आचार्य श्री 108 सन्मतिसागरजी महाराज परम शिष्य क्षपकराज प. पू. आचार्य श्री 108वर्धमानसागरजी महाराज दक्षिण की रविवार रात्रि 11 बजकर 34 मिनट पर सिद्धक्षेत्र कुंथलगिरी में सल्लेखनापूर्वक समाधी मरण हुआ।
वीर कर्म योद्धा
दुनिया कहती है मृत्यु जीवन की सबसे बड़ी हार है लेकिन आज दुनिया ऐसा दृश्य देख रही है जिसने मृत्यु की पूरी परिभाषा ही बदल दी भावुक हृदय से हजारों लोग मौन थे कही आँखे नम थी, लेकिन उन सबके बीच एक चेहरा बिल्कुल शांत ऐसी शांति जो शब्दों से नहीं ऐसी शांति जो शब्दों से नहीं साधना से जन्म लेती है।
मन ने सोचा क्या देख लिया आचार्य श्री ने जो हम आज तक नहीं देख पाए फिर धीरे धीरे एक बात समझ आई मृत्यु का भय मृत्यु का नहीं होता मृत्यु का भय में का टूटने का होता है और जिस दिन में शरीर से हटकर आत्मा में टिक जाता है, उसदिन मृत्यु अंत तक नहीं रहती।
एक परिवर्तन बन जाती है मात्र एक पर्याय का परिवर्तन शायद कुछ संत इसलिए मृत्यु से भयभीत नहीं होते। वे उसे भी समता से स्वीकार करते हैं। जिस समता से उन्होंने पूरा जीवन दिए एक वीर योद्धा की तरह पास आते मृत्यु ने आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने पास आती मृत्यु ने आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज को नहीं बदला उनके चेहरे की मुस्कान नहीं बदली उनके जीवन की समता नहीं बदली बल्कि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने मृत्यु के भय का अर्थ बदल डाला जय हो ऐसे महान संत की जो युगों युगों तक जीवंत रहेंगे।
आचार्य श्री ऐसे महासंत हुए जिन्हें अपने शिष्य मुनि श्री108 विद्यासागर महाराज को अपना आचार्य पद दिया और स्वयं शिष्य बनकर उन्होंने उनसे सलेखना का व्रत लिया। निश्चित रुप से ऐसे संत जिन्होंने 13 दिन की श्रेष्ठ यम सल्लेखना के बाद 5 जुलाई 2026 को क्षपकराज वर्धमानसागर जी महाराज दक्षिण ने देह त्याग कर दिया। आचार्य देव के इस मृत्यु महोत्सव पर बारंबार नमोस्तु करते हैं। ऐसी सल्लेखना के साक्षी होना भी बड़े सौभाग्य का विषय है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
