अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी ने लिया आचार्य श्री 108 विहर्ष सागर महाराज का आशीर्वाद, किशनगढ़ में होगा 32वाँ चातुर्मास♦
अजमेर।
गणाचार्य श्री 108 विरागसागर महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के पावन अवसर पर राष्ट्रसंत आचार्य श्री 108 विहर्ष सागर जी महाराज ससंघ (15 पिच्छी) ने अपने 32वें चातुर्मास की घोषणा धर्मनगरी किशनगढ़ के लिए की। यह घोषणा श्री दिगंबर जैन चैत्यालय मंदिर, संत निलय, पुष्कर रोड, कोटड़ा (अजमेर) में आयोजित भव्य धार्मिक समारोह के दौरान श्रद्धालुओं की उपस्थिति में की गई।
केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने प्राप्त किया गुरुदेव का आशीर्वाद
जिनबिंब स्थापना की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री एवं अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी आचार्यश्री के दर्शन एवं आशीर्वाद लेने पहुंचे। उन्होंने गुरुदेव से किशनगढ़ चातुर्मास को लेकर विनम्र निवेदन भी किया।
इस अवसर पर आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य पारसमल–राजेशकुमार पांड्या परिवार (ऊंटड़ा वाले) को प्राप्त हुआ। वहीं किशनगढ़ की ओर से श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश बैद, श्री आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष प्रकाश गंगवाल, राजकुमार दोषी एवं संजय पापड़ीवाल ने चातुर्मास हेतु भावपूर्ण निवेदन किया।
राजस्थान में दूसरा चातुर्मास
आचार्य श्री 108 विहर्ष सागर जी महाराज का यह राजस्थान में दूसरा चातुर्मास होगा। इससे पूर्व वर्ष 2025 में उनका पहला चातुर्मास सलूंबर (उदयपुर संभाग) में संपन्न हुआ था। इस वर्ष धर्मनगरी किशनगढ़ को चातुर्मास का सौभाग्य मिलने से जैन समाज में हर्ष और उत्साह का वातावरण है।
13 जुलाई को मंगल विहार, 15 जुलाई को संभावित मंगल प्रवेश
आचार्य श्री ससंघ का 13 जुलाई को अजमेर से किशनगढ़ के लिए मंगल विहार होगा। 15 जुलाई को धर्मनगरी किशनगढ़ में उनका मंगल प्रवेश संभावित है। चातुर्मास को लेकर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं ने तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं।
आचार्य श्री की दीक्षा यात्रा
गणाचार्य श्री 108 विरागसागर महाराज के सान्निध्य में आचार्य श्री 108 विहर्ष सागर जी महाराज को दो प्रमुख दीक्षाएं प्राप्त हुईं—
ऐलक दीक्षा: 23 फरवरी 1996, देवेंद्र नगर (पन्ना, मध्य प्रदेश) में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान।
मुनि दीक्षा: 14 दिसंबर 1998, दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बरासों (भिंड, मध्य प्रदेश) में, जिसके उपरांत उन्हें ‘मुनिश्री 108 विहर्ष सागर’ नाम से अलंकृत किया गया।
आचार्य श्री का तप, त्याग और आध्यात्मिक जीवन जैन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है। किशनगढ़ में होने वाला उनका 32वाँ चातुर्मास धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो.: 9929747312
