जब राम का चातुर्मास अनियत होता था तो हनुमान का भी अनियत ही होगा 

धर्म

जब राम का चातुर्मास अनियत होता था तो हनुमान का भी अनियत ही होगा 

 

    जी हा राम जैसे गुरु, आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के वर्षायोग को लेकर कयास लगाए जाते थे की चातुर्मास कहा होगा उसी प्रकार हनुमान जैसे उनके शिष्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज का वर्षायोग भी अनियत ही होगा।

 

जगह जगह से सभी के चातुर्मास की खबरें अब आना शुरू हो रही है लेकिन जिसका सारे भारत को इंतजार है लेकिन वह साधक सुधासागर महाराज बहते जा रहे हैं अपने गुरु की अनियत परंपरा में। 

कुछ भी नहीं पूर्व नियोजित स्वत ही अपने आप नियोजित होता चला जाता है कोई कहता है जबलपुर कोई कहता है चांदखेड़ी कोई कहता है कोटा कोई कहता है इंदौर कोई कहता है बुंदेलखंड की ही धरा पर होगा। 

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इसी संस्मरण को लेकर एक बात याद आती है जब आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज का वर्षा योग उसे वक्त का कहीं होना था लेकिन निश्चित नहीं था और भक्ति भाव के साथ लोग नाचते गाते झूमते हुए अपने-अपने स्थान पर वर्षायोग हेतु निवेदन कर रहे थे। तब आचार्य श्री ने कहा था कि आप लोगों की भक्ति अद्भुत है और आपने वर्षा योग कहां होगा यह तो पता है लग जाएगा लेकिन आप लोगों ने चातुर्मास का निवेदन करते हुए इस चुनाव प्रचार का रूप दे दिया है शायद वही रूप अब देखने को मिल रहा है जब पूज्य मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज का वर्षा योग अपने-अपने नगरों में करने हेतु लोग उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं कोई बसे लेकर पहुंच रहा है कोई ट्रेन लेकर पहुंच रहा है कोई जय जयकार करते हुए आ रहा है। 

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  राजस्थान वासियों को भी आस इसलिए बंध रही है की गुरुदेव राजस्थान की सीमा से महज कुछ ही किलोमीटर दूर पर हैं इसलिए आस बंध रही है मंजिल राजस्थान के लिए दूर नहीं है वर्ष 2014 में भी जब गुरुदेव का वर्षा योग कोटा राजस्थान में हुआ था तब भी गुरुदेव का राजस्थान में प्रवेश गुना से होते हुए था। उम्मीद तो बंधती है क्या होगा यह तो भविष्य के गर्भ में है।

 

गुरुदेव ने राजस्थान में भी अनेक तीर्थ का कायाकल्प किया है जिसमें चांदखेड़ी भी है जहां गुरुदेव विराजमान है वहां से कुछ ही दूरी पर स्थित है वहां भी एक नया इतिहास लिखा जा सकता है क्योंकि गुरुदेव तो जहां जाते हैं वहां इतिहास बनते चले जाते हैं हम कहें तो शिक्षा का प्राण चंबल के तट पर बसी कोटा नगरी पर भी गुरुदेव ने पावन तीर्थ का निर्माण कर दिया है और कहें तो तपोदय तीर्थ बिजोलिया को भी नया आयाम दिया है और क्या कहे सुदर्शनोदय तीर्थ आवा, सिलोदय तीर्थ सिलोर, ज्ञानोदय तीर्थ नारेली जैसे स्थानो को महातीर्थ का रूप दिया है वही ज्ञानोदय तीर्थ नारेली इससे अछूता नहीं है। 

       जी हा राजस्थान की पावन धरती कर रही है यह आस 

  गुरुदेव का राजस्थान में हो चातुर्मास 

   भक्ति से शक्ति शक्ति से युक्ति का हो प्रवास 

   गुरुदेव आओ आओ करो राजस्थान में करो चातुर्मास।

          अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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