गोसेवा एवं प्राणी सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है : निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज
सतना। दयोदय गौशाला में परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की पावन स्मृति में चरणचिह्न स्थापना समारोह एवं भव्य धर्मसभा का आयोजन निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज, मुनि श्री पवित्र सागर महाराज, ऐलक श्री निश्चय सागर महाराज तथा ऐलक श्री निजानंद सागर महाराज के मंगल सान्निध्य में श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज ने कहा कि “गोसेवा एवं प्राणी सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।” उन्होंने कहा कि जीवों के प्रति दया, करुणा और अहिंसा का भाव ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है। प्रत्येक व्यक्ति को बेजुबान प्राणियों की रक्षा एवं सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।

उन्होंने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपने संपूर्ण जीवन में जीवदया, पशु संरक्षण और अहिंसा का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। उनके प्रेरणादायी जीवन से सभी धर्मों एवं वर्गों के लोगों ने बेजुबान प्राणियों की सेवा और संरक्षण का संकल्प लिया।


मुनि श्री ने कहा कि वर्ष 1998 के पंचकल्याणक महोत्सव के उपरांत आचार्य श्री की प्रेरणा से दयोदय गौशाला की स्थापना हुई थी। आज यह गौशाला हजारों निराश्रित गौवंश एवं अन्य पशुओं की सेवा का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। उन्होंने कहा कि यह संस्था सतना नगर के नागरिकों की सेवा, सहयोग और समर्पण का जीवंत उदाहरण है तथा अब जीवदया का प्रेरणादायी तीर्थ बन गई है।


उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गौशाला परिसर में स्थापित आचार्य श्री के पावन चरणचिह्न आने वाली पीढ़ियों को सेवा, त्याग, करुणा एवं अहिंसा के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा प्रदान करते रहेंगे।

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि चरणचिह्न स्थापना का सौभाग्य समाधिस्थ व्रती श्रावक श्री निर्मलकुमार जी सर्राफ की पावन स्मृति में श्रीमती राजुल देवी सर्राफ, श्रीमती नम्रता पीयूष जैन ‘लप्पू’, राजवीर ‘वीर’, युवराज ‘यूवी’ एवं सर्राफ परिवार, सतना को प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में दयोदय गौशाला के अध्यक्ष अभिषेक जैन ‘लकी’, पंचायत सभा के मंत्री संदीप जैन, राजेश जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो.: 9929747312
