वैराग्य स्थली पहुंच भावुक हुए मुनिश्री आदित्य सागर महाराज
नंदनवन तीर्थ पर प्रथम मंगल आगमन, पुरानी स्मृतियां हुईं ताज़ा; आज होगा धरियावद नगर में ऐतिहासिक मंगल प्रवेश
धरियावद।
आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य एवं श्रुतसंवेगी युवा संत मुनिश्री 108 आदित्य सागर महाराज का ससंघ धरियावद से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित नंदनवन तीर्थ पर प्रथम बार मंगल आगमन हुआ। उनके आगमन से समूचे क्षेत्र के जैन समाज एवं श्रद्धालुओं में उत्साह, श्रद्धा और भक्ति का अनुपम वातावरण देखने को मिला।
प्रातःकाल से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु तीर्थ परिसर में एकत्रित हो गए। जयघोषों और भक्तिमय वातावरण के बीच मुनि संघ का भव्य स्वागत किया गया। जैन समाज के पंच महानुभावों ने श्रीफल भेंट कर अगवानी की, वहीं महिलाओं ने मंगल कलश के साथ पारंपरिक रीति से स्वागत कर मुनि संघ की परिक्रमा करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। बैंड-बाजों की मधुर धुनों, भक्ति गीतों और जयकारों से पूरा तीर्थ परिसर धर्ममय हो उठा।


नंदनवन तीर्थ पहुंचने पर मुनिश्री ने हेमवंत जिनालय में विराजमान भगवान चंद्रप्रभु के दर्शन किए तथा विदुषी आर्यिका विशुद्धमति माताजी की समाधि स्थली सहित पूरे तीर्थ क्षेत्र का अवलोकन किया। इस दौरान वे भावुक हो उठे और अपने जीवन से जुड़ी अनेक प्रेरणादायक स्मृतियों को श्रद्धालुओं के साथ साझा किया।


मुनिश्री ने बताया कि गृहस्थ जीवन में लगभग 14 वर्ष की आयु में उनका धरियावद आगमन हुआ था। इसी पावन तीर्थ पर विराजित विदुषी आर्यिका विशुद्धमति माताजी के सान्निध्य में उन्हें वैराग्य की प्रेरणा मिली और आध्यात्मिक जीवन की दिशा प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि समय के साथ तीर्थ परिसर में अनेक विकास कार्य हुए हैं, लेकिन आर्यिका माताजी की तपस्या स्थली, जिनवाणी, पीछी, कमंडल एवं उनके उपयोग की अन्य पावन सामग्री को देखकर पुरानी स्मृतियां सजीव हो उठीं। उन्होंने नंदनवन तीर्थ को अपने आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणास्थली एवं साधना की पवित्र भूमि बताया।

युवा पीढ़ी के प्रेरणास्रोत हैं मुनिश्री आदित्य सागर महाराज
अपने ओजस्वी, तर्कपूर्ण एवं जीवनोपयोगी प्रवचनों के कारण मुनिश्री आदित्य सागर महाराज देशभर में विशेष पहचान रखते हैं। जीवन प्रबंधन, संस्कार, संयम, आत्मानुशासन और सकारात्मक चिंतन पर आधारित उनके प्रवचन लाखों लोगों तक सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा उनके विहार, आहार और धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बनकर आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा ग्रहण कर रहे हैं। समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आज होगा धरियावद नगर में ऐतिहासिक प्रथम मंगल प्रवेश
मुनिश्री आदित्य सागर महाराज का धरियावद नगर में प्रथम मंगल प्रवेश शुक्रवार प्रातः भव्य एवं ऐतिहासिक रूप से होगा। मंगल प्रवेश यात्रा गांधीनगर से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न जैन मंदिरों के दर्शन करती हुई चंद्रप्रभु जिनालय पहुंचेगी। इसके उपरांत विशाल धर्मसभा एवं मंगल प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति ने नगर प्रवेश को लेकर व्यापक तैयारियां पूर्ण कर ली हैं तथा श्रद्धालुओं में इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312
