परमपूज्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने दी ऐलक दीक्षा*अमीर आदमी को लुटने का डर हमेशा बना रहता है -मुनि पुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज

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परमपूज्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने दी ऐलक दीक्षा*अमीर आदमी को लुटने का डर हमेशा बना रहता है -मुनि पुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज

गुना–

जिले के सबसे बड़े तीर्थ अतिशय क्षेत्र पुण्योदय तीर्थ बजरंगगढ़ चल रहें पंच मुखी पंच कल्याणक महोत्सव के दौरान आज दीक्षा कल्याणक पर आचार्यश्री विद्यासागर जी का स्मरण कर निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने दी क्षुल्लक श्री सुधीरसागर जी महाराज को ऐलक दीक्षा भक्तों की जय जय कार के बीच प्रदान की गई इसके पहले प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भ इया के मंत्रोच्चार के बीच भगवान को पूरे विधि-विधान के साथ दीक्षा संस्कार किये गये

 

 

तीसरी बार हुए मुनि पुगंव के कर कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा

इस दौरान मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि गत वर्ष तीर्थ चक्रवर्ती मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने सबसे पहले 23 नवंबर को दर्शनोदय तीर्थ थूबोनजी एक साथ चौदह ऐलक दीक्षाये प्रदान की इसके बाद अभी पंच कल्याणक महोत्सव के प्रथम चरण में ऐलक सुमंगलसागर जी महाराज एवं क्षुल्लक श्री शुभम् सागर जी महाराज को दीक्षा प्रदान की थी एक वर्ष से भी कम समय में ये तीसरा मौका है कि जब परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज द्वारा दीक्षा दी गई है ज्ञातव्य है कि गुना पंच कल्याणक के पहले से ही दीक्षा के कयास लगायें जा रहे थे ‌‌।।

 

 

इस काल में दुःख नहीं हो तो भी दुःख आने का डर लगा रहता है

धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि दुखमा काल चल रहा है कर्मभूमि के कालों का नाम है दुखमा सुषमा और दुखमा इन दो कालों में जन्म लेने वाला मनुष्य इतिहास बनाता है। संस्कृति बनाता है। कुछ ऐसी चीज बनाता है जिसे हम वैज्ञानिक कहते हैं। कुछ नया निर्माण करता है। चौथे काल में नहीं है अपन पंचम काल में जिस काल का नाम है दुख यानी यह काल में सब तरफ व्यक्ति को दुख ही दुख नजर आता दुख नहीं हो तो दुख आने का डर रहता है जी रहा है लेकिन मरने का दुख है।

 

अमीर को भी हर समय लगा रहता है है लेकिन लुटने का दुख है। स्वस्थ है लेकिन बीमार होने का दुख है। अच्छा गाड़ी में जा रहा है। एक्सीडेंट का दुख है। यानी 24 घंटे कोई ना कोई शल लगी रहती है। जिस समय हंसी दुख में बदल जाए कुछ नहीं कह सकते। कौन साथी किस मोड़ पर कब छूट जाए कुछ नहीं कह सकते। ऐसी स्थिति में मनुष्य को एक अधिकार दिया शाश्वत इतिहास बनाने का। उसका जीवन विश्वसनीय नहीं है। उसका जीवन स्थिर नहीं है।

 

 

 

कर्म भूमि को गांड गिफ्ट दी है प्रकृति ने

उन्होंने कहा कि कर्म भूमि को गॉड गिफ्ट दी प्रकृति ने कि वो अपना इतिहास अमर कर सकता है। वो अपनी जिंदगी की निशानी अमर कर सकता है। और उसी के प्रतीक रूप में दुखमा काल में भी या तो रत्नत्रय पालन करो। रत्नत्रय पालन करने से हमारी जिंदगी का भविष्य उज्जवल होता है। या तो सर्वश्रेष्ठ रखना चाहिए। इस दोनों कालों में व्यक्ति को और कहीं भी किसी को भी पूज्य बनने का अधिकार नहीं है। कोई नहीं बन सकता।Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.Smiling man with folded arms in a plaid shirt on the left; sunrise over mountains and a Hindi motivational quote on the right: 'जिनने धैर्य सीख लिया, उसने जीत का रास्ता पा लिया.'

 

बात पूज्य दो ही कालों के व्यक्ति बनते हैं। दुखमा सुषमा के और दुखमा के। जो पूज्य बन सकते हैं, पत से पावन बन सकते हैं, परमेष्ठी बन सकते हैं, जगत पूज्य बन सकते हैं।

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तो पहला अधिकार तो हमारे लिए हर व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि भले ही मैं दुखमा काल में जन्मा हूं। लेकिन मैं पूज्य बन सकता हूं इस दिशा में प्रयास करना चाहिए और दीक्षा इसी दिशा में एक कदम है जो पूज्यता की ओर ले जाता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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