आर्यिका श्री महाशयमति माताजी ने सन्मति भवन में केश लोचन किया
पारसोला
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज अपना संयम वर्ष का 56 वां चातुर्मास सन्मति भवन पारसोला में कर रहे हैं आज अनेक श्रद्धालुओं के सामने आर्यिका श्री महाशयमति माताजी ने अपना केश लोचन किया ।केश लोचन के बारे में संघ की आर्यिका श्री वत्सलमति जी ने चर्चा में बताया कि प्रत्येक दिगंबर साधु को 2 माह से 4 माह की अवधि के भीतर के केशलोचन करना अनिवार्य है केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण है । केशलोचन के माध्यम से शरीर से राग और मोह दूर होता है केश लोचन की प्रक्रिया में आर्यिका श्री ने बताया कि केश्लोचन करते समय केवल राख का उपयोग किया जाता है ।
जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है बालों का लोचन अगर नहीं किए जाएं तो उसमें छोटे-छोटे जीवो की उत्पत्ति होने की संभावना होती है जैन साधु अहिंसा धर्म के महाव्रती होते हैं। बाल हाथों से इसलिए उखाड़े जाते हैं कि बालों को कटिंग करने के लिए सेविंग कराने के लिए अन्य द्रव्य की आवश्यकता होती है जैन साधु अपरिग्रही होते हैं।
इसलिए जैन साधु अपने हाथ से केशलोचन करते हैं बाल सौंदर्य का प्रतीक हैं इससे राग और आकर्षण होता है। केशलोच से शरीर से ममत्व दूर होता है केशलोचन के समय तप,संयम, धैर्य के साथ धर्म की प्रभावना होती है जिस दिन जैन साधु केशलोच करते हैं उस दिन उपवास करते हैं ।केशलोचन देखकर अनुमोदना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है कर्मों की निर्जरा होती है।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
