लूणवा में भूगर्भ से प्राप्त प्रतिमाओं के कारण अतिशय क्षेत्र था किंतु आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज की समाधि होने से यह निर्वाण भूमि तीर्थ हो गया है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
लूणवा
एक अजैन दर्जी की प्रेरणा से श्वेतांबर धर्मी मां ने दिगंबर धर्म के संस्कार शिक्षा प्राप्त कर अपने पूरे परिवार को शिक्षा दी।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अपने शिक्षा गुरु आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी महाराज के अनेक संस्मरण भावविभोर होकर बताते हुए कहा कि हमें आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी के साथ ही रहने का सौभाग्य रहा उनसे ही हमने दीक्षा के बाद धर्म जिनवाणी का ज्ञान प्राप्त किया। अनेक वर्षायोग उनके साथ किए।भावी समाधि स्थल की अनायास चर्चा में हमने लूँणवा का सुझाव दिया था ,जिसे वह मान कर इधर आये ।हमें जिंदगी भर पीड़ा है कि हम उनकी समाधि के समय नहीं रहे।

गुरुदेव ने जीवन में जो प्राप्त किया वह सबको दिया ।बेटा उनका प्रिय शब्द था ,जो भी कहते थे चिंतन कर विचार करके कहते थे। गुरु भक्त डा राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि
गुर देव जब सामायिक करते थे तब ग्रंथ का जो पेज सामने खुला रहता था उसी पर ही पूरा चिंतन करते थे पेज बदलते भी नहीं थे। आपने अपने ज्ञान से तार्किक धर्म प्रभावना की ।

जयपुर खानिया चर्चा सभी जानते है।आचार्य श्री शिव सागर जी के संघ के कुशल संचालक रहे।आचार्य श्री शिव सागर जी आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि के बाद आपको संघ समाज ने आचार्य बनाना चाहा किंतु वर्षों पूर्व वह आचार्य पद लेने का त्याग कर चुके थे। ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी में 12 वर्ष की नियम संलेखना आचार्य श्री धर्म सागर जी से ली अवधि पूर्ण होने पर ज्येष्ठ माह में 8 उपवास पूर्ण कर 9 वे दिन सम्यक समाधि मरण बालू रेती के समुद्र लूँणवा में हुई। समाधि के बाद पहली बार संघ के अनेक साधुओं ने समाधि स्थल के दर्शन ,वंदना भाव विभोर होकर किये।इसके पूर्व प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा में प्रथम पट्टाधीशआचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी महाराज की प्रतिमा उनकी समाधि स्थली अतिशय क्षेत्र लूँणवा जिला नागौर में 27 जून 2026 को परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ 37 पिच्छी के साथ मंगल प्रवेश होकर संघ सानिध्य में आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी,आचार्य श्री वर्धमानसागर जी की भक्ति भाव पूर्वक ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या सहित सभी ने की ।
प्रतिमा विराजमान के पूर्व आचार्य श्री के स्वस्तिक ,मंत्रोच्चार विधिपूर्वक भूमि शुद्धि की विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान पश्चात आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी की प्रतिमा श्रीमती तारा देवी,श्री वर्धमान, श्री सुशील,श्री निर्मल, श्री कैलाश काला परिवार संभर लेक द्वारा विराजित की गई विराजित की गई।

धर्म सभा में दीप प्रवज्जलन और शास्त्र भेंट लख्मीचंद मानिकचंद जैन अजमेरा परिवार लूणवा ने तथा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन मानिकचंद,सुरेश चंद ,रमेश चंद,महेश चंद बड़जात्या परिवार मुरलीपुरा वाले जोबनेर ने किया इस अवसर पर अनेक नगरों से भक्त पधारे। उल्लेखनीय हैं कि सन 1962 में आचार्य श्री शिव सागर जी सानिध्य में मान स्तंभ की प्रतिष्ठा हुई थी।
डा राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
