विश्वास के नाम पर अविश्वास
अर्चना जैन ग्लोबल विमेन प्रभारी दिल्ली की कलम से
श्रद्धा आस्था जिनशासन की ने नीव मानी जाती है।सम्यग्दर्शन है तो ज्ञान और चरित्र सार्थक है, पुरे विश्व में जितने भी कार्य हो रहे हैं लगभग सभी
विश्वास के बल पर हो रहे है कोई सा भी क्षेत्र सामजिक, धार्मिक,राजनैतिक सभी स्थानों पर विश्वास की ही प्रमुखता दृष्टिगोचर होती है। विश्वास से ही कार्य सफल होते है और कई स्थानों
पर विश्वास के नाम पर दगाबाजी, धोखाधड़ी भी हो जाया करती है।अंधविश्वास न हो तो ज्यादा उचित लगता है विश्वासघात करने वालो को सम्मान की दृष्टि से नही देखा जाता।

किसी भी क्षेत्र में विश्वासपात्र बनके “रचक दगा बहुत दुखदायी है “चाहे कोई कितनी भी मायाचारी करे एक दिन प्रकट हो जाती है पंचम काल में विश्वास के नाम पर अविश्वास का प्रभाव ज्यादा दिखाई देता है ऊपर कुछ,- अन्दर कुछ,पता लगाना बहुतकठिन है। व्यापारी वर्ग विश्वास के साथ ही माल खरीदता, बेचता है फिर भी धोखा खा जाता है।वैवाहिक सम्बन्ध भी विश्वास से हो होते हैं, लेकिन वर्तमान में क्या क्या हो है ज्यादा खुलासा उचित नही हैं। यहां तक चिकित्सा के क्षेत्र में सेवा भावना वो नाम मात्र की रह गई है।
आचार्य कहते हैं की राजनीति मायाचार का गढ़ है। संसार से मुक्त होना चाहते हैं तो सरलता सहजता का व्यवहार करो, तभी कल्याण होगा।

श्रीमती अर्चना जैन ग्लोबल विमेन प्रभारी दिल्ली श्री दिगंबर जैन ग्लोबल महासभा
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
