श्री अशोक पाटनी आरके मार्बल की और से उत्तर भारत के सबसे बड़े बाहुबली भगवान का प्रथम कलश से हुआ अभिषेक एवम 1008कलशो से हुआ महामस्तकाभिषेक

धर्म

श्री अशोक पाटनी आरके मार्बल की और से उत्तर भारत के सबसे बड़े बाहुबली भगवान का प्रथम कलश से हुआ अभिषेक एवम 1008कलशो से हुआ महामस्तकाभिषेक 

गुना 

नगर के बाहर इन्दौर बाईपास रोड पर नव निर्माण तीर्थ क्षेत्र सर्वोदय ज्ञान तीर्थ क्षेत्र गुना में पैंतालीस फ़ीट ऊंचाई पर पांच फिट ऊंचे कमल पर उत्तर भारत के सबसे बड़ी प्रतिमा को आज पूरे विधि-विधान के साथ परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीपभइया के निर्देशन में विराजमान कर प्रथम बार एक हजार आठ कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया जिसमें प्रथम कलश का सौभाग्य जैन समाज के भामाशाह श्रीमान अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी, श्रीमति शांता सुरेश पाटनी श्रीमति तारीका विमल पाटनी आर के मार्बल्स परिवार किशनगढ़ ने आनलाइन प्राप्त किया वहीं दूसरी ओर से यह सौभाग्य राजीव रस्सी धर्मेन्द्र बाझल एस के जैन ने किया वही जगत कल्याण की कामना के लिए महा शान्ति धारा संघस्थ ब्रह्मचारीयो के साथ मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने प्राप्त किया।

 

 

 

 

इस दौरान प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भ इया ने कहा कि दक्षिण भारत के श्रवणबेलगोला में दुनिया के आठवें आश्चर्य के रूप में विख्यात गोमटेश्वर बाहुबली भगवान का उत्तर भारत में इतना बड़ा रूप परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के सान्निध्य में प्रतिष्ठा के बाद पहली बार भगवान का महा मस्तकाभिषेक हो रहा है और हम पहला सौभाग्य आनलाइन दक्षिण भारत में भगवान बाहुबली का प्रथम अभिषेक करने वाले जैन समाज के भामाशाह श्रीमति सुशीला अशोक पाटनी श्रीमति शांता सुरेश पाटनश्रीमति तारीका विमल पाटनी आर के मार्बल्स परिवार किशनगढ़ को दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर से ये महा सौभाग्य राजीव रस्सी धर्मेन्द्र बाझल प्राप्त करने जा रहे हैं भगवान विराजमान करने का सौभाग्य भी आज ही मिलने जा रहा है मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि सर्वोदय ज्ञान तीर्थ गुना में भगवान बाहुबली स्वामी की ये प्रतिमा उत्तर भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा है जिनका आज पहली बार एक हजार आठ कलशों से महा मस्तकाभिषेक होने जा रहा है।

 

 

प्रकृति ने धर्मात्मा को धर्म करने की तो पापी को पाप करने की भी छूट दी है मुनिश्री 

इस दौरान धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि धर्मात्मा को प्रकृति ने भरपूर धर्म करने की छूट दी है आप जितना चाहे धर्म कर सकते हो पापी को पाप करने की धर्म में छूट दी जाती है पाप करते करते फूल जाता है प्रकृति की व्यवस्था है कि पापी पाप करते हुए ऐसा अहंकारी हो जाता है फिर उसे कर्म अपने बंधन में जकड़ता चला जाता है फिर कर्म ही ऐसी सजा देता है उसको कोई बचाने वाला नहीं मिलता एक गोच होती है जो गाय के स्तन में चिपक जाती है वह दुध नही पीतीं वह भी वहां खून ही पीती है खोटे कर्म करने वाले को प्रकृति उकसाती है तव ही तो उसे कठोर दण्ड दिया जा सके अच्छाईयों में भी जिसे बुराई देखने वाले को भी प्रकृति के पास व्यवस्था है।

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *