मुनि पुंगव श्री सुधासगर महाराज के कर कमलों से हुई दीक्षा अतीत के पुण्य वाले का दिन अच्छा निकलता शाम अच्छी नहीं निकलतीं- मुनिश्री सुधासागर महाराज

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मुनि पुंगव श्री सुधासगर महाराज के कर कमलों से हुई दीक्षा अतीत के पुण्य वाले का दिन अच्छा निकलता शाम अच्छी नहीं निकलतीं- मुनिश्री सुधासागर महाराज
गुना
-परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री 108सुधासागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भ इया के निर्देशन में चल रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ गजरथ महोत्सव में आज प्रातः काल से ही भक्तों की दौड़ अयोध्या नगरी की ओर चल रही थी।

 

जगत कल्याण की कामना के लिए महा शान्ति धारा की गई दोपहर में मुनिश्री के कर कमलों से ब्रह्मचारी चक्रेश जैन सागर व विजय जैन मुंगावली की भव्य जैनेश्वरी दीक्षा ली जिनका नाम 105 ऐलक सुमंगल सागर जी महाराज एवम क्षुल्लक 105 श्री शुभम सागर जी महाराज रखा गया।

कुछ दस्तूर ऐसे हैं जिन्हें टाला नहीं जा सकता
इस दौरान विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि
कुछ दस्तूर ऐसे हैं जिन्हें टाला नहीं जा सकता है नियोग और नियती अपने आप पलायन कर जाती है पुरुषार्थी व्यक्ति भाग के विपरित चल कर नियोग और नियती की सारी सीमाएं तोड़ कर चल देता है और मंजिल की ओर बढ़ता चला जाता है आज वो घटना घट रही है जिसे राजा रिषभ देव ने अपने अंदर के विल पावर के माध्यम से अंधेरी रात में चल देते हैं बेटियां भी बाप का नाम कर सकते हैं।

बेटियां भी बाप से सवाई होती हैं ये ब्राह्मी सुन्दरी ने जगत को बताया दिया

ब्राह्मी सुन्दरी ने नियती को ठुकराकर अपने पिता के मस्तक ऊंचा उठा दिया यदि बेटियां चाहें तो बेटे से एक कदम आगे बढ़ कर अपने परिवार को पिता को गौरवान्वित कर सकती हैं सती सीता जी ने जगत को बता दिया एकाकी जीवन भी ठाठ से जिया जा सकता है देवों को पुरुषार्थ करने की आवश्यकता नहीं होती है धर्म पुरुषार्थ का मतलब दीक्षा ग्रहण कर संयम को धारण कर लेता है आज पुरुषार्थ करके अपने जीवन को अच्छा बना सकते हैं मोक्ष मार्ग कठपुतलियां से नहीं चलता हम चाहे तो अपने जीवन को बना ले। आज रिषभ देव ने भाग्य को ठुकराकर दिगम्बरी दीक्षा ग्रहण कर संयम के मार्ग पर आगे बढ़ते चले गए।

अतीत के पुण्य से हम कुछ दिन चलकर नये नये पुण्य प्राप्ति के मार्ग खोजें
इस दौरान मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि अतीत के पुण्य वाले दिन अच्छे निकलते है शाम अच्छी नहीं निकलतीं अतीत का पुण्य है अब वर्तमान के पुण्य को बढ़ाना बहुत जरूरी है अतीत की कमाई में यदि तुम ने वर्तमान के पुण्य को शामिल नहीं किया तो वे ज्यादा समय तक नहीं चलता ऐसे ही पूर्वजों की इजाजत मिली यदि तुम ने पूर्वजों की इजाजत में तुमने अपनी स्वयं के प्रयास से कुछ नहीं जोड़ा तो अच्छे अच्छे लोगो को कोई जय जिनेन्द्र नहीं करता राम राम तक नहीं करता अपने कुल की इज्जत को बढ़ाने के लिए कुछ ना कुछ जरूर करना ऐसे ही जो संस्कार तुम्हारे पूर्वजों से मिले उसमें कुछ ना कुछ बढ़ा कर करना तुम्हारे पिता के क्या थे उसमें एक नियम कायदे से एक नियम को जोड़ना है।

उत्साह से भरने के लिए नये नये तीर्थ की वंदना करते रहना चाहिए
उन्होंने कहा कि उत्साह से भरने के लिए नये नये नीयम लेना कुछ ऐसे संकल्प करना जिससे आपकी जिंदगी बहुत अच्छी बन जाये 1981की घटना है खजुराहो में आचार्य श्री संघ सहित विराजमान थे चर्चा चली शिखर जी जाने हम सब उत्साह से भर गये और चल दिए लेकिन आचार्य श्री ने दूसरी ओर विहार कर तो उत्साह कम हो गया तब आचार्य श्री ने कहा कि हमेशा उत्साह से भरे रहना चाहिए सब कुछ करने के बाद उस समय तुम्हारे मन में भाव आये जो वैभव दिख रहा है इससे अभी कुछ और वाकी है यहां तक कि आपके नेत्र सूर्य विमान में बैठे प्रभु के दर्शन भी कर ले तो भी भाव आये अभी कुछ बाकी है थक जाना जिंदगी कि विराम है थक गए तो रूक गये नहीं थकने का काम नहीं है अभी मैंने जो कुछ भी किया वह पूर्णता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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