*”श्रुतपंचमी पर उमड़ा जनसैलाब, 111वें आचार्य पदारोहण दिवस पर हुआ भव्य आयोजन”*
दाहोद, 19 जून 2026।
श्रुतपंचमी के पावन अवसर पर मुनिकुंजर ज्येष्ठाचार्य आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर) के 111वें आचार्य पदारोहण दिवस का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन तथा आचार्य भगवंत के पादप्रक्षालन सहित विभिन्न मांगलिक क्रियाओं के साथ हुआ। इस अवसर पर अंकलीकर परंपरा के आचार्यों के चित्रों का अनावरण किया गया तथा अंकलीकर पत्रिका विशेषांक का विमोचन हुआ।

इसके साथ ही पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज द्वारा रचित “लाख टके की बात”, “श्रमण संस्मरण एपिसोड”, “The Consumption Code पुस्तक” तथा सहस्त्रनाम स्तोत्र सुस्वरमति माताजी द्वारा प्रस्तुत ऑडियो का भी भव्य विमोचन किया गया।


महाराष्ट्र स्थित कुंजवन तीर्थ के ट्रस्टियों ने द्वय आचार्य भगवंतों के चरणों में उपस्थित होकर वर्ष 2029 में आयोजित होने वाले कुंजवन कार्यक्रम हेतु विनम्र आमंत्रण प्रस्तुत किया।


कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज को उनकी विद्वत्ता, साहित्य साधना एवं प्रभावशाली प्रवचन शैली के लिए “व्याख्यान वाचस्पति” उपाधि से अलंकृत किया गया।
चैनल महालक्ष्मी के शरद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए जैन जनगणना, मोरपंख, संतों की सड़क दुर्घटनाओं, तीर्थों की सुरक्षा सहित अनेक समसामयिक विषयों पर समाज को जागरूक करने वाले मार्मिक उद्बोधन दिए।
आचार्य भगवन श्री सुनील सागरजी के चरणों में चातुर्मास हेतु विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु निवेदन लेकर पहुंचे। राजस्थान के मुंगाणा से लगभग 400 श्रद्धालु गुरुदेव के चरणों में चातुर्मास हेतु निवेदन करने पहुंचे। वहीं सागवाड़ा, बुंदेलखंड एवं इंदौर सहित विभिन्न क्षेत्रों के सकल जैन समाज ने भी विनम्र निवेदन प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज एवं अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने प्रेरणादायी उद्बोधन प्रदान किए। आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने अपने संबोधन में संतों की सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं, तीर्थों की सुरक्षा एवं जैन जनगणना के महत्व पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत किया।
वहीं आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने गुरु भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में कभी भी गुरु की निंदा नहीं करनी चाहिए, माता-पिता का सदैव सम्मान करना चाहिए तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में भव्य मंगल आरती का आयोजन हुआ। भक्तिमय वातावरण में हजारों श्रद्धालुओं ने आरती में सहभागिता की। विशाल पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा तथा पूरे आयोजन में अपार उत्साह, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
*– आर्यिका 105 श्री संपूर्णमति माताजी*
