सिद्धक्षेत्र पर हुई आर्यिका दीक्षा, सिद्ध क्षेत्र पर ही हुई समाधि आर्यिका 105 शांतमति माताजी की समाधि संतो के सानिध्य में कुंडलपुर तीर्थ पर हुई।
कुंडलपुर
आचार्य भगवान 108 विद्यासागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका मां 105 गुरुमति माताजी की संघस्थ एलआर्यिका 105 शांतमति माताजी की समाधि समस्त मुनि महाराज एवं आर्यिका संघ के सान्निध्य में समय प्रातः 10.10 मिनिट पर कुंडलपुर सिद्ध क्षेत्र में हुई।
साधना के जो प्रहरी होते हैं व संत होते हैं उनकी यही भावना होती है कि जीवन के अंत समय में संलेखनापूर्वक समाधि हो, वह भी सिद्ध

क्षेत्र पर हो, और संत सानिध्य में हो ऐसा ही माता जी के जीवन में हुआ। पूज्य माताजी की सन 1997 में आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज से सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर में आर्यिका दीक्षा ली।
माताजी का जीवन परिचय





पूज्य माताजी का ग्रहस्थ अवस्था का नाम शशि जैन था, मंडी बामोरा जिला विदिशा की नगर गौरव स्वर्गीय श्री बाबूलाल जैन एवं माताश्री गुणमाला जैन की राजदुलारी का जन्म 4 मार्च 1967 को हुआ था।
इन्होंने लौकिक शिक्षा बीएप्रथम वर्ष पूर्ण करने के उपरांत इनका मन सांसारिक चक्र में नहीं लगा और यह विरक्ति का भाव और मन में आत्म कल्याण का भाव लेकर इन्होंने 20 जनवरी 1989 को ब्रह्मचर्य व्रत पनागर जबलपुर में ग्रहण किया। यह संयम के पथ पर आगे बढ़ती गई और आगे चलकर इन्होंने एक प्रतिमा का व्रत दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट में ग्रहण किया। यह और आगे बड़ी और वह घड़ी आ गई जब नारी का सर्वोच्च पद 6 जून 1997 को इन्हें आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के कर कमलों से सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर में आर्यिका दीक्षा प्रदान की गई। वर्तमान में यह आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से प्रथम दीक्षित आर्यिका 105 गुरुमति माताजी के संघ में साधना रत थी।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
