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वकील कॉलोनी निवासी वर्धमान जयवंत सेठी परिवार में जन्मे निलय सेठी ने छोटी उम्र में सांसारिक सुखों से दूरी बना ली त्याग का तपः 9 साल के निलय ‘शुभंकर’ बन संयम पथ पर

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वकील कॉलोनी निवासी वर्धमान जयवंत सेठी परिवार में जन्मे निलय सेठी ने छोटी उम्र में सांसारिक सुखों से दूरी बना ली त्याग का तपः 9 साल के निलय ‘शुभंकर’ बन संयम पथ पर

 भीलवाड़ा

जहां आज के बच्चे वीडियो गेम, मोबाइल और खिलौनों की दुनिया में खोए रहते हैं, वहीं भीलवाड़ा का एक 9 वर्षीय बालक त्याग, तपस्या और संयम की ऐसी मिसाल बन गया है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। यह बालक है ‘शुभंकर भैया’, जिनका बचपन अब आध्यात्मिक साधना और कठोर नियमों के बीच बीत रहा है।

 

भीलवाड़ा की वकील कॉलोनी निवासी वर्धमान और जयवंत सेठी परिवार में 20 फरवरी 2017 को जन्मे निलय सेठी ने बेहद छोटी उम्र में सांसारिक सुखों से दूरी बना ली। मुंबई के प्रतिष्ठित आईसीएसई बोर्ड स्कूल में तीसरी कक्षा तक पढ़ने वाले निलय के मन में वैराग्य की भावना इतनी प्रबल हुई कि उन्होंने संयम का मार्ग अपना लिया। 25 जनवरी 2025 को आचार्य सुनील सागर महाराज ने उन्हें ब्रह्मचारी संस्कार देकर ‘शुभंकर भैया’ नाम दिया। Hindi snack advertisement with a red headline, blue quote box, mountain background, and bowls of mixed namkeen in the bottom-right corner.Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.

 

 

 

इसके बाद 25 अप्रैल 2026 को परतापुर में आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सानिध्य में उन्होंने ‘दो प्रतिमा’ के कठोर व्रत धारण किए।

गिरनार पर्वत की 10 हजार सीढ़ियां चढ़कर 7 बार वंदना कर चुके

शुभंकर भैया केवल कुएं का पानी और घर में तैयार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। वे नंगे पांव पदविहार करते हैं और चटाई पर शयन करते हैं। संस्कृत-प्राकृत के कई जटिल ग्रंथ उन्हें कंठस्थ हैं। पिछले वर्ष उन्होंने गिरनार पर्वत की 10 हजार सीढ़ियां चढ़कर 7 बार वंदना भी पूर्ण की थी।

 

 

 

नंगे पांव पदविहार, बाजार की हर खाद्य वस्तु से दूरी

शुभंकर भैया का जीवन किसी तपस्वी से कम नहीं है। वे केवल कुएं का पानी पीते हैं और घर में ताजा पिसे आटे व मसालों से बना भोजन ही ग्रहण करते हैं। बाजार की हर खाद्य वस्तु से उन्होंने दूरी बना रखी है। दिन में दो बार भोजन और चार बार जल ग्रहण करने वाले शुभंकर शाम 6 बजे के बाद अन्न-जल का त्याग कर देते हैं। वे संघ के साथ नंगे पांव पदविहार करते हैं तथा जमीन, चटाई या लकड़ी के तख्त पर ही विश्राम करते हैं।

         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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