पंच कल्याणक : एक किमी लंबी घटयात्रा, 6 हाथी, 30 से ज्यादा बग्घियां शामिलकरोड़ रत्नों की वर्षा पर जो एक रत्न अपने खजाने में न रखे उसके घर गर्व में आते हैं भगवानः मुनिश्री सुधासागर महाराज 

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पंच कल्याणक : एक किमी लंबी घटयात्रा, 6 हाथी, 30 से ज्यादा बग्घियां शामिलकरोड़ रत्नों की वर्षा पर जो एक रत्न अपने खजाने में न रखे उसके घर गर्व में आते हैं भगवानः मुनिश्री सुधासागर महाराज 

गुना। 

बुधवार को पंचकल्याणक की शुरूआत सुबह घटयात्रा के साथ हुई। यह यात्रा सराफा बाजार स्थित शांतिनाथ जिनालय से शुरू हुई। हालांकि इसका दूसरा छोर हाट रोड पर था। इसमें 6 हाथी और 30 से ज्यादा बग्घियां शामिल थीं। साथ ही 4 विंटेज कार भी थी। इन पर पंचकल्याणक के प्रमुख पात्र बैठे हुए थे। घटयात्रा शहर के बाजार से होते हुए बीजी रोड स्थित नसियाजी तक पहुंची। यहां पांच दिन तक आयोजन चलेगा।

 

 

मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस संसार में चारों ओर पवित्र आत्माएं विचरण करती हैं, लेकिन मनुष्य ने अपने कर्मों और विकारों से उन्हें अपवित्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि जो दृश्य देखने योग्य हैं, उन्हें हम नहीं देखते और जो सुनने योग्य हैं, उन्हें सुनने का प्रयास नहीं करते। शास्त्रों की दृष्टि से संसार को देखने पर वास्तविकता का बोध होता है और जीवन की अनेक भूलों का एहसास होता है।

 

 

 

मुनिश्री ने कहा कि किसी भी वस्तु या परंपरा का महत्व उसके रहते हुए समझ में नहीं आता। जब वह हमारे पास से चली जाती है, तब उसकी वास्तविक कीमत का आभास होता है। उन्होंने जैन कुल में जन्म लेने को सौभाग्य बताते हुए कहा कि इसकी महत्ता को समझना आवश्यक है।

 

 

 

उन्होंने कहा कि जैन सिद्धांत के अनुसार भगवान किसी को कुछ नहीं देते, फिर भी श्रद्धालु थाली भरकर उनके चरणों में पहुंचते हैं और खाली हाथ लौटते हैं। इसके बावजूद उनके जीवन के कार्य सिद्ध हो जाते हैं। ऐसे ही भगवान त्रिलोकीनाथ कहलाते हैं, जिनके समक्ष समर्पण ही सबसे बड़ा साधन है। 

 

 

भगवान ऋऋषभदेव के गर्भ कल्याणक का उल्लेख करते हुए

महान पिता के यहां भगवान का अवतरण हुआ, जिसका स्मरण आज गर्भ कल्याणक पूर्वार्ध के रूप में किया जा रहा है। मुनिश्री ने बताया कि भगवान के गर्भ में आने से छह माह पूर्व से राजा नाभिराय के राज्य में प्रतिदिन साढ़े दस करोड़ रत्नों की वर्षा होने लगती उस समय न कोई गरीब होता है, न दुखी, न बीमार और न ही कोई व्यसन या आत्महत्या जैसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि राजा नाभिराय इतने दानी थे कि रत्नों की वर्षा होने पर भी उन्होंने एक रत्न अपने लिए नहीं रखा और सब कुछ प्रजा के लिए समर्पित कर दिया। Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.

 

 

मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि वह सत्य को सामने होते हुए भी पहचान नहीं पाता। जिन बातों को देखना, सम्झना और सुनना चाहिए, उनसे वह दूर रहता है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति शास्त्रों के गवाक्ष से संसार को देखता है, तब उसे जीवन की वास्तविकता का ज्ञान होता है। मूलाचार जैसे ग्रंथ केवल धार्मिक पुस्तकें नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक हैं। इनके अध्ययन से यह समझ में आता है कि क्या उचित है और हमें अपने जीवन में कौन-से आदर्श अपनाने चाहिए। शास्त्र आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग का सच्चा पथ दिखाते हैं।Collage: woman with red petals on left, decorative diya on right, Hindi text about astrology and a phone number for advice.Smiling man in plaid shirt with folded arms beside a sunset mountain scene and inspirational text in Hindi/ Punjabi on the right.Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.

 

 

 

भगवान के गर्भ कल्याणक की महिमा अद्भुत है

 

मुनिश्री ने भगवान ऋषभदेव के गर्भकल्याणक की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जब भगवान माता के गर्भ में आते हैं, तब प्रकृति और समाज दोनों में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं। राजा नाभिराय के राज्य में छह माह पूर्व से प्रतिदिन साढ़े दस करोड़ रत्नों की वर्षा होने लगी थी। साढ़े बारह योजन क्षेत्र तक सुख, समृद्धि और शांति का वातावरण बन गया था। किसी प्रकार का दुख, बीमारी, अकाल मृत्यु या व्यसन नहीं था। उन्होंने कहा कि राजा नाभिराय की दानशीलता और लोक कल्याण की भावना अद्वितीय थी। उन्होंने रत्नों को अपने खजाने में न रखकर पूरी प्रजा के लिए समर्पित कर दिया, जो आदर्श शासन और त्याग का अनुपम उदाहरण है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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