बेटे-बेटी को मोक्ष मार्ग पर भेजने के बाद अब पिता भी वैराग्य पथ पर, लिया संन्यासघर छोड़ने से पहले मिलने वालों से मांगी माफी, नम आंखों से परिवार ने कराया वस्त्र परिवर्तन

धर्म

बेटे-बेटी को मोक्ष मार्ग पर भेजने के बाद अब पिता भी वैराग्य पथ पर, लिया संन्यासघर छोड़ने से पहले मिलने वालों से मांगी माफी, नम आंखों से परिवार ने कराया वस्त्र परिवर्तन 

मुंगावली

भौतिकता की अंधी दौड़ और पारिवारिक मोह-माया के इस युग में त्याग और वैराग्य का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी विजय भैया ने अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में संसार की तमाम सुख-सुविधाओं और रिश्तों को अलविदा कह दिया है। वे गुना में विराजमान निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के संघ में शामिल हो गए हैं। शुक्रवार को समाज जनों की मौजूदगी में नम आंखों से परिवार और उनके वस्त्र परिवर्तित कराए गए।

 

यह परिवार जैन समाज के लिए प्रेरणापुंज बन चुका है। विजय भैया ने सबसे पहले अपने बेटे को मोक्ष मार्ग पर भेजा, जिन्होंने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षा ली और आज वे मुनि श्री विशद सागर जी महाराज के रूप में देश में धर्म प्रभावना कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी पुत्री को भी गुरु चरणों में समर्पित कर आजीवन धर्म मार्ग पर लगा दिया। अब स्वयं विजय भैया भी सब कुछ छोड़कर वैराग्य पथ पर बढ़ चले हैं।Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.

 

 

मुंगावली की धरा सौभाग्यशाली है मुनिश्री 

इस मौके पर मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने गृहस्थों को भी मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ने की राह दिखाई है। आज संघ में दो गृहस्थ शामिल हो रहे हैं, जिनमें मुंगावली के गौरव मुनि श्री विशद सागर जी के गृहस्थ जीवन के पिता विजय भैया शामिल हैं। मुंगावली से कई मुनि और आर्यिकाएं दीक्षित होकर देश भर में जैन धर्म का परचम लहरा रहे हैं।

 

 

 

शाम को मिली संघ में एंट्री, आजीवन तोड़े सारे रिश्ते-नाते

शुक्रवार शाम को आयोजित जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम के दौरान मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने पूरी धार्मिक क्रियाओं के साथ विजय भैया को अपने संघ में प्रवेश कराया। उन्हें आजीवन संसार की समस्त वस्तुओं का त्याग करने और सभी सांसारिक रिश्तों से मुक्त होने का कड़ा नियम दिलाया गया।Smiling man with folded arms in a plaid shirt on the left; sunrise over mountains and a Hindi motivational quote on the right: 'जिनने धैर्य सीख लिया, उसने जीत का रास्ता पा लिया.'

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विदाई से पहले हर परिचित से मांगी माफी

घर छोड़ने से पहले विजय भैया नगर के सभी मिलने वालों के पास पहुंचे। उन्होंने जीवन के किसी भी क्षण में हुई अनजानी गलतियों के लिए हाथ जोड़कर माफी मांगी। शुरुआत में लोगों को लगा कि वे मजाक कर रहे हैं, लेकिन जब हकीकत सामने आई तो तो पूरा नगर भावुक हो गया।Collage: woman with red petals on left, decorative diya on right, Hindi text about astrology and a phone number for advice.

            संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

 

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