जीवन की एक भूल वर्षों की तपस्या, प्रतिष्ठा को मिटा सकती है: मुनिश्री सुधासागर महाराज

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जीवन की एक भूल वर्षों की तपस्या, प्रतिष्ठा को मिटा सकती है: मुनिश्री सुधासागर महाराज 

 गुना

मनुष्य को अपने मन, वचन और कर्म को इतना पवित्र बना लेना चाहिए कि उसका प्रत्येक विचार, व्यवहार और कार्य समाज के लिए प्रेरणा बन जाए। जीवन में की गई एक छोटी सी भूल वर्षों की साधना, प्रतिष्ठा और सम्मान को मिट्टी में मिला सकती है।

यह विचार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य, मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने शनिवार को धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति का चरित्र ऐसा होना चाहिए कि उसके संपर्क में आने वाला भी स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस करे। उन्होंने भगवान श्रीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां-जहां उनके चरण पड़े, वह भूमि भी पवित्र हो गई। अयोध्या आज भी सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक है। महान व्यक्तित्व केवल स्वयं का नहीं, बल्कि अपने परिवार, समाज और क्षेत्र का गौरव बढ़ाते हैं।

धर्मसभा में मुनिश्री ने स्त्री जीवन की महत्ता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने तीर्थंकर आदिनाथ भगवान की पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी का उदाहरण देते हुए कहा कि त्याग, मर्यादा और आत्मसंयम के कारण वे इतिहास में अमर हो गई। उन्होंने कहा कि स्त्री पर्याय कभी तुच्छ नहींरही, बल्कि भारतीय परंपरा में उसे सदैव सम्मान प्राप्त हुआ है। मुनिश्री ने कहा कि जैन धर्म कभी झूठ नहीं बोलता। व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है।

रावण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उसे सोने की लंका मिली, लेकिन उसका दुरुपयोग करने पर उसे दंड भी भोगना पड़ा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां आएं, धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। धर्म और सदाचार ही मनुष्य जीवन को सफल एवं सार्थक बनाते हैं।Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.

इतना पवित्र बनो कि संपर्क में आने वाला भी सौभाग्यशाली महसूस करे

मुनिश्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जीवन में श्रेष्ठ बनना चाहता है तो उसे गुणवान लोगों की प्रशंसा करनी चाहिए और उनके सत्संग में रहना चाहिए। अच्छे लोगों के गुण धीरे-धीरे हमारे जीवन में भी उतरने लगते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों की उन्नति देखकर प्रसन्न होता है और उनके समान बनने का प्रयास करता है, वही वास्तव में महान कहलाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ऐसा जीवन जीना चाहिए जिससे उसके कारण परिवार और समाज का सम्मान बढ़े।

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विवाह के उदाहरण से समझाते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी के व्यवहार और चरित्र से उसके माता-पिता, पत्नी और परिवार को गौरव महसूस हो, तो वही जीवन की सच्ची सफलता है।Collage: woman with red petals on left, decorative diya on right, Hindi text about astrology and a phone number for advice.

             संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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