समाज की संकीर्ण सोच पर प्रहार करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा-बेटी मंगल का स्वरूप है, बहू को अमंगल कहना अज्ञानताः मुनिश्री
गुना
मनुष्य जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग आत्मसंयम और सकारात्मक दृष्टि से होकर गुजरता है। बेटी और बहू के प्रति समाज की संकीर्ण सोच पर प्रहार करते हुए मुनि पुगव श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि जिस समाज में बेटी के जन्म को अमंगल माना जाता है, वहां वास्तविक धर्म का अभाव है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी दृष्टि और विचारों को शुद्ध रखना चाहिए, क्योंकि बुरे कर्मों का परिणाम जन्म-जन्मांतर तक भुगतना पड़ता है।
गाय की बछड़ी शुभ, लेकिन बेटी क्यों नहीं?: धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि अधिकांश लोग पुत्र की कामना करते हैं, लेकिन बेटी नहीं चाहते। आश्चर्य की बात यह है कि वही व्यक्ति गाय से बछड़ी चाहता है और उसे सौभाग्य का प्रतीक मानता है। यदि बहू बेटी को जन्म दे तो उसे अमंगल समझ लिया जाता है, जबकि बेटी स्वयं मंगल का स्वरूप है। उन्होंने कहा कि यह सोच बदलने की आवश्यकता है।

जो सुंदरता और संवेदनशीलता मनुष्य को आकर्षित करती है, उसी के जन्म से वह बचना चाहता है, यह समाज का बड़ा विरोधाभास है।

देव कभी दूसरे के वैभव या संपत्ति पर दृष्टि नहीं डालते
मुनिश्री ने कहा कि देव लोक का वैभव अलौकिक होता है, फिर भी देव कभी दूसरे के वैभव या संपत्ति पर दृष्टि नहीं डालते। उन्होंने कहा कि दूसरों की समृद्धि देखकर मन खराब करना या ईर्ष्या करना आत्मिक पतन का कारण बनता है। यदि किसी वस्तु या लक्ष्य की सिद्धि प्राप्त करनी है तो सबसे पहले स्वयं पर नियंत्रण स्थापित करना होगा। आत्मसंयम, सद्विचार और संतोष ही जीवन को सफल और सार्थक बनाते हैं।


उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी दृष्टि, विचार और आचरण को पवित्र बनाने का आह्वान किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
