व्यसन और आत्मघात से नहीं मिलेगी मुक्ति, कुलाचार का पालन ही मानव जीवन की पहचान: मुनिश्री सुधासागर महाराज
गुना
व्यसन, आत्मघात और सदाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रवचन देते हुए जगत पूज्य मुनि पुगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य संसार के दुखों से तो बचना चाहता है, लेकिन उनसे मुक्त होने का वास्तविक प्रयास नहीं करता।
उन्होंने कहा कि व्यसन करना भी एक प्रकार का आत्मघात है, क्योंकि व्यक्ति उसके दुष्परिणाम जानने के बावजूद उसे छोड़ना नहीं चाहता। गुटखा, तंबाकू और शराब जैसी आदतें शरीर और आत्मा दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं। मुनिश्री ने कहा कि विरोधी हिंसा करने वाला जीव सम्यग्दृष्टि हो सकता है, लेकिन आत्मघात करने वाला व्यक्ति नियम से पाप का भागी बनता है। उन्होंने धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संयम, सदाचार और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने संदेश दिया।
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि सुधासागर जी महाराज ने कहा कि धर्माचार मिले या न मिले, लेकिन कुलाचार का पालन प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। यदि आर्यखंड में जन्म लेकर व्यक्ति अपने संस्कारों और कुलाचारों का पालन नहीं करता तथा समाज को दूषित करता है, तो उसे अगले जन्म में मिलेच्छ खंड में जन्म लेना पड़ सकता है, जहां केवल दुख और कष्ट ही प्राप्त होते हैं।


मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए बतायाकि जैसे एक माता प्रसव पीड़ा का कष्ट सहने के बाद भी पुनः संतान जन्म देने को तैयार हो जाती है, उसी प्रकार मनुष्य दुख भोगते हुए भी मोह और आसक्ति से मुक्त नहीं होना चाहता। उन्होंने कहा कि आत्मघात केवल शारीरिक मृत्यु नहीं, बल्कि जीवन में गलत आदतों और दुर्व्यसनों को अपनाना भी आत्मघात है।
लिया आशीर्वादः
प्रवचन के पश्चात जैन युवा संगठन के पदाधिकारियों ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। संगठन अध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि आगामी पंचमुखी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव को सफल बनाने के संबंध में मुनिश्री ने आवश्यक मार्गदर्शन दिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
