गुरु माँ गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी के परम भक्त साहित्यकार डॉक्टर रिखब चन्द राँका कल्पेश जयपुर ने लिया मंगल आशीष

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गुरु माँ गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी के परम भक्त साहित्यकार  डॉक्टर  रिखब चन्द राँका कल्पेश जयपुर ने लिया मंगल आशीष

सम्मेद शिखर जी
परम पूज्या सिद्धांत रत्न सर्वाधिक दीक्षा प्रदात्री गुरु माँ गणिनी आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी के परम भक्त साहित्यकार डॉक्टर रिखब चन्द राँका कल्पेश जयपुर ने सम्मेद शिखर तीर्थ पहुँचकर मंगल आशीष लिया।
दर्शन कर उन्होंने जो अपने भाव गुरु माँ के प्रति व्यक्त किए उनकी भावाव्यक्ति

हरत्यघं संप्रति हेतुरेष्यतः शुभस्य पूर्वाचरितैः कृतं शुभैः।
शरीरभाजां भवदीयादर्शनं व्यनक्ति कालत्रितयेऽपि योग्यताम् ।।
हे गुरू माँ ! आपका दर्शन शरीरधारियों की त्रिकाल में भी योग्यता ( पवित्रता) को प्रकट करता है। वर्तमानकाल में पाप को नष्ट करता है, (भविष्यत् काल में) आनेवाले मंगल का कारण होता है,
वह स्वयं ) पूर्व (जन्म) में किए हुए पुण्यों का फल होता है।अर्थात् आपका दर्शन भूत,वर्तमान और भविष्य तीनों कालो में मंगलकारी व कल्याणकारी होता है।

 

परम पूजनीया भारत गौरव गणिनी आर्यिका विशुद्धमति माताजी व गणिनी विज्ञमति माताजी के पावन चरणों मे कोटि कोटि वंदामि।
आपके आशीर्वाद से सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र की वंदना व पंचतीर्थ की वंदना सानन्द सम्पन्न हुई। मधुबन के मध्यलोक में सपरिवार आपके दर्शनकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। हम सब सकुशल जयपुर पहुँच गए।

संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमण्डी

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