शाकाहार ही संस्कार व संस्कृति की पवित्रता का आधार’ प्रणम्य सागर महाराज संतों का सान्निध्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है। सांसद सुधीर गुप्ता
| मंदसौर
तारबंगला मंदिर परिसर में चल रहे प्रवचनों के दौरान अहँ योग प्रणेता मुनिश्री108 प्रणम्य सागरजी महाराज ने कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य पवित्रता व शुद्धता है। भले ही परंपराएं और मान्यताएं अलग-अलग हों लेकिन धर्म का सार जीवमात्र के कल्याण व आत्मशुद्धि में निहित है।मुनिश्री ने कहा कि शुद्ध आहार केवल शाकाहार है। भक्ष्य-अभक्ष्य का विवेक नहीं रखने वाला व्यक्ति सही ज्ञान से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि संस्कार और संस्कृति की पवित्रता शुद्ध जीवनशैली और सात्विक आहार से बनी रहती है। बच्चों को शुद्ध और अशुद्ध पदार्थों के बीच का अंतर समझाना परिवार की जिम्मेदारी है।उन्होंने जीवन में लक्ष्य और उद्देश्य को प्राथमिकता देने पर भी बल दिया।
धर्मसभा में सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि जैन समाज की जीवन पद्धति उच्च आदर्शों पर आधारित है। संतों का सान्निध्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है। उन्होंने समाज से जनसंख्या और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे विषयों पर भी चिंतन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं मुनिश्री का पाद प्रक्षालन डॉ. राजकुमार अजयकुमार बाकलीवाल, नंदकिशोर अग्रवाल व अनिल बोहरा द्वारा किया गया। समाज की ओर से सांसद का स्वागत प्रवास समिति अध्यक्ष जयकुमार बड़जात्या, दिगंबर समाज अध्यक्ष अनिल जैन, मुनि सेवा समिति अध्यक्ष अरविंद मेहता, शांतिलाल बड़जात्या सहित अन्य समाजजनों ने किया। संचालन डॉ. चंदा भरत कोठारी ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
