महापुरुष बिना किसी अस्त्र अपने सद्‌गुणों से संपूर्ण लोक को अपना बना लेते हैं: पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज

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महापुरुष बिना किसी अस्त्र अपने सद्‌गुणों से संपूर्ण लोक को अपना बना लेते हैं: पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज
भिंड

निराला रंग बिहार परिसर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत मंगलवार को ज्ञान कल्याणक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान महामुनि आदिकुमार (भगवान आदिनाथ) का प्रथम आहार उत्सव विधि-विधानपूर्वक मनाया गया। गन्ने के रस के रूप में इच्छुक रस प्राप्ति के प्रसंग का मंचन कर आहार चर्या संपन्न कराई गई। इसके बाद दोपहर में समवसरण की भव्य रचना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर प्रभु की आराधना की।

 

 

समवसरण सभा में जिज्ञासुओं ने धर्म, जीवन और आत्मकल्याण से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका समाधान पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की महिमा अद्वितीय होती है। आत्मज्ञानी पुरुष के प्रभाव से क्रूर से क्रूर प्राणी भी शांत हो जाते हैं और आपसी वैरभाव समाप्त हो जाता है। उन्होंने भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर स्वामी तक के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां-जहां तीर्थंकरों का विहार हुआ, वहां शांति, समृद्धि और सद्भाव का वातावरण स्थापित हुआ।Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.

 

पट्टाचार्य ने कहा कि महापुरुष बिना किसी अस्त्र-शस्त्र के अपने सद्‌गुणों और आत्मबल से संपूर्ण लोक को अपना बना लेते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मविद्या का प्रकाश अपने भीतर जागृत करने तथा किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट न पहुंचाने का आह्वान किया।

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इस अवसर पर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, संजीव सिंह कुशवाह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन, महिला-पुरुष एवं बच्चे उपस्थित रहे।

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समस्त जीवों की रक्षा का भाव ही वास्तविक धर्म है

धर्मसभा को संबोधित करते हुए पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि देश, समाज, धर्म और समस्त जीवों की रक्षा का भाव ही वास्तविक धर्म है। पंच स्थावर और त्रस जीवों की सुरक्षा के बिना मानव जीवन का अस्तित्व भी सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि संसार का सुख और कल्याण जीव मात्र के संरक्षण में ही निहित है तथा मनुष्य को प्रकृति और समस्त जीवों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

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आत्महत्या नहीं, सकारात्मक जीवन का संकल्प लें:
अपने प्रवचन में उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ रही आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी समस्याओं से घबराकर जीवन समाप्त करना समाधान नहीं है। धर्म में समाधि मरण को ही श्रेष्ठ माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या न करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर यह संकल्प लिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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