तप और त्याग की अद्भुत मिसाल : मुनि श्री सर्वार्थ सिद्धि सागर जी महाराज*

धर्म

*तप और त्याग की अद्भुत मिसाल : मुनि श्री सर्वार्थ सिद्धि सागर जी महाराज*

आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज के ससंघ में विराजमान तपस्वी संत मुनि श्री सर्वार्थ सिद्धि सागर जी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या और आत्मसाधना का अनुपम उदाहरण है। कठोर नियमों एवं आध्यात्मिक अनुशासन के कारण वे श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बने हुए हैं।

 

मुनि श्री का जन्म 28 जून 1959 को दिल्ली में स्वर्गीय श्री धर्मपाल जैन एवं स्वर्गीय श्रीमती प्रेमवती जैन के परिवार में हुआ। गृहस्थ जीवन में उन्होंने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए एक पुत्र एवं तीन पुत्रियों का पालन-पोषण किया। किंतु आत्मकल्याण की भावना और वैराग्य के उदय ने उन्हें आध्यात्मिक पथ की ओर अग्रसर किया।Advertisement for Sudha Amrit mustard oil showing metal tin and assorted bottles (5 L, 2 L, 1 L, 500 ml, 200 ml) with 100% pure claim and contact number 9602091568.Smiling man in plaid shirt with folded arms beside a sunset mountain scene and inspirational text in Hindi/ Punjabi on the right.

1 मार्च 2017 को उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार किया तथा 1 अक्टूबर 2017 को उदयपुर में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज से जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर संयम जीवन में प्रवेश किया।

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दीक्षा के पश्चात मुनि श्री ने अनेक कठिन नियम धारण किए। वे प्रतिदिन केवल एक बार आहार ग्रहण करते हैं तथा उसमें भी केवल गेहूं का ही उपयोग करते हैं। उन्होंने आजीवन मीठा, दही, तेल, गुड़, भिंडी एवं टमाटर का त्याग किया हुआ है। इसके अतिरिक्त वे 24 घंटे में केवल तीन घंटे ही विश्राम करते हैं और वह भी एक ही करवट में।

 

मुनि श्री ने अनिश्चितकालीन मौन व्रत धारण किया हुआ है। दिन में केवल एक घंटे आचार्य श्री के साथ आवश्यक चर्चा के समय ही वे वचन प्रयोग करते हैं। उनकी तपस्या का सबसे विशेष पक्ष यह है कि वे पिछले लगभग पाँच वर्षों से भीषण गर्मी में प्रतिदिन 2 से 3 घंटे तक धूप में खड़े रहकर आतापन योग एवं सामायिक साधना कर रहे हैं।

हाल ही में सिद्धक्षेत्र पावागढ़ में आयोजित कल्पद्रुम विधान के दौरान भी मुनि श्री की कठोर साधना देखने को मिली। वे प्रतिदिन प्रातः 4:30 बजे पैदल पर्वत की वंदना करने जाते रहे और सात दिनों तक लगातार यह नियम निभाने के पश्चात ही आहार ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने मार्ग में मिलने वाले किन्नरों, निर्धनों, भिक्षुकों एवं साधुओं को धर्मोपदेश एवं आशीर्वाद देकर धर्म प्रभावना का कार्य भी किया।

मुनि श्री सर्वार्थ सिद्धि सागर जी महाराज का तप, संयम और साधनामय जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। श्रद्धालुजन उनके त्याग एवं आत्मसाधना को नमन करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन से प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।

      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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