पैंतीस और सैंतीस कभी साथ नहीं रह सकते..क्योंकि दोनों के बीच छत्तीस का आँकड़ा है..!
मैं ज़िंदा हूँ… अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
कुशलगढ़ बांसवाड़ा राजस्थान अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज की अहिंसा संस्कार पदयात्रा पुष्पगिरी की और चल रही है उसी श्रुंखला में आज उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि। एक किसी बड़े समारोह में, जहाँ कई मशहूर हस्तियाँ मौजूद थीं, एक बुज़ुर्ग महिला छड़ी के सहारे मंच पर आईं और अपनी सीट पर बैठ गईं।
होस्ट ने पूछा — क्या आप आज भी डॉक्टर के पास अक्सर जाती हैं-?
बुज़ुर्ग महिला मुस्कराकर बोलीं — हाँ, मैं तो अक्सर जाती हूँ!
होस्ट ने पूछा— क्यों-?बुजुर्ग महिला हँसते हुए बोलीं — मरीज़ों को डॉक्टर के पास जाना चाहिए, तभी तो डॉक्टर ज़िंदा रहेगा!उस बुजुर्ग महिला की हाजिर जवाबी पर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।_
फिर होस्ट ने पूछा — तो क्या आप फार्मासिस्ट के पास भी जाती हैं-?
बुज़ुर्ग महिला बोलीं — ज़रूर! क्योंकि फार्मासिस्ट को भी तो जीना है!
_अबकी बार और ज्यादा तालियां बजी।_
होस्ट ने हँसते हुए पूछा — तो क्या आप फार्मासिस्ट की दी हुई दवाइयाँ भी लेती हैं-?
बुज़ुर्ग महिला तुरन्त बोलीं — नहीं! दवाइयाँ तो अक्सर फेंक देती हूँ… मुझे भी तो जीना है!_इस पर तो पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा।_
अंत में होस्ट ने कहा — आपका धन्यवाद कि आप इस इंटरव्यू में आईं।बुज़ुर्ग महिला मुस्कराकर बोलीं — आपका भी धन्यवाद…मुझे मालूम है, आपको भी तो जीना है!
श्रोता देर तक हँसते रहे और तालियाँ बजती रहीं।_
फिर किसी ने एक और सवाल किया — क्या आप अपने व्हाट्सएप ग्रुप में भी एक्टिव रहती हैं-?
बुज़ुर्ग महिला बोलीं — हाँ, बीच-बीच में मैसेज भेजती रहती हूँ… ताकि सबको पता लगे कि मैं ज़िंदा हूँ! वरना लोग समझेंगे कि मैं चली गई और ग्रुप एडमिन मुझे हटा देगा!
कहते हैं, यह दुनिया के सबसे मज़ेदार चुटकुलों में से एक माना गया, क्योंकि — सबको जीना है! तो मेरे प्यारे दोस्तों — मुस्कुराते रहिए, संदेश भेजते रहिए और अपनों से जुड़े रहिए। लोगों को पता चलता रहना चाहिए कि आप ज़िंदा हैं, खुश हैं और तंदुरुस्त हैं।
ज़िंदगी है, तो ज़िंदादिली भी होनी चाहिए…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
