‘युग प्रधान तप चक्रवर्ती’ उपाधि से अलंकृत आचार्य प्रसन्न सागर हर माह एक उपवास कार्यक्रम में अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज अलंकृत किया गया
कुशलगढ़। बांसवाड़ा राजस्थान
अंतर्मना आचार्य श्री 108प्रसन्न सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में रविवार को नवकार गार्डन में आयोजित ‘हर माह एक उपवास’ कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति, साधना, त्याग और आध्यात्मिक ऊर्जा के अनुपम संगम के रूप में संपन्न हुआ। इस अवसर पर दिगंबर बीसपंथी समाज, कुशलगढ़ द्वारा आचार्य श्री को प्रशस्ति पत्र भेंट कर ‘युग प्रधान तप चक्रवर्ती’ की उपाधि से अलंकृत किया गया। उपाधि का प्रशस्ति वाचन योगगुरु स्वामी रामदेव के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पतंजलि योगपीठ के मीडिया प्रभारी एस. के. तिजारावाला ने किया।
दिगंबर बीसपंथी समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकालीन भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नवकार गार्डन पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के जयकारों से वातावरण को धर्ममय बना दिया। कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री की मासिक पत्रिका एवं विशेष प्रकाशन का भव्य विमोचन किया गया। समारोह में दिगंबर बीसपंथी समाज अध्यक्ष जयंतीलाल सेठ, मंत्री हंसमुखलाल सेठ, पतंजलि योगपीठ के मीडिया प्रभारी एसके तिजारावाला, समाजसेवी प्रदीप जैन, क्षेत्रीय विधायक रमीला खड़िया, पूर्व संसदीय सचिव भीमाभाई डामोर, भारत भक्ति संस्थान मुंबई के संस्थापक बाबा सत्यनारायण मौर्य सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन पूर्व तहसीलदार विजयलाल कोठारी एवं उनके परिवार द्वारा किया गया।

धर्मसभा में मुनि श्री सामायिक सागर जी महाराज ने ध्यान एवं योग सत्र का संचालन करते हुए कहा कि ध्यान और योग आत्मबल, मानसिक शांति तथा स्वस्थ जीवन का आधार हैं। उन्होंने सभी को नियमित योग और ध्यान अपनाने की प्रेरणा दी। अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर ने सभी श्रद्धालुओं से प्रत्येक माह कम से कम एक दिन उपवास रखने, सात्विक जीवनशैली अपनाने तथा समाज में सदाचार और संस्कारों के प्रसार का संकल्प लेने का आह्वान किया।
इस अवसर पर स्वामी रामदेव के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. के. तिजारावाला ने कहा कि आचार्य प्रसन्न सागर महाराज का तप, त्याग और संयम आज के समाज के लिए प्रेरणा का स्रोता है। हर माह एक उपवास अभियान केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संस्कारित और जागरूक समाज निर्माण का एक सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम में कला और संस्कृति की भी अनुपम छटा देखने को मिली। विक्रमा कनेरिया (पिपलिया मंडी) ने मनमोहक बांसुरी वादन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया तथा मात्र चार मिनट में आचार्य श्री का चित्र बनाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। वहीं बाबा सत्यनारायण मौर्य ने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश दिया।

प्रसिद्ध गायक विजय चौहान (देवास) ने अपने मधुर भजनों और कर्णप्रिय प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में स्थानकवासी श्रीसंघ अध्यक्ष रजनीकांत खाब्या, मूर्तिपूजक श्रीसंघ अध्यक्ष संघवी कमलेश कावड़िया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड संचालक कैलाश राव, ब्राह्मण समाज के एडवोकेट हरेंद्र पाठक, दयानंद आश्रम के एडवोकेट धर्मेंद्र कंसारा, राम मंदिर समिति अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, पंडित हेमेंद्र पांडया सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। ऐसी जानकारी
प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद रोमिल पाटणी सोनकच्छ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
