आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि स्थली एवं शिष्या श्री शांतिमति माताजी की जन्मभूमि पर आचार्य संघ का मंगल पदार्पण समाज ने की मंगल आरती कर की भावभीनी अगवानी
सीकर 23 जुलाई
श्री आदिनाथ(3) ,श्री पदमप्रभ,(1)श्री चंद्रप्रभ(2), श्री शांतिनाथ((2) ,श्री पार्श्वनाथ(2) ,श्री महावीर भगवान(1) के जिनालयों से सज्जित आचार्य श्री धर्म सागर जी सहित अन्यकी समाधि स्थली, आचार्य श्री वर्धमान सागर से दीक्षित समाधिस्थ आर्यिका 105श्री शांतिमति माताजी सहित अन्य की जन्म ,कर्मभूमि ,आचार्य श्री अजित सागर जी सहित अनेकों की दीक्षा स्थली ,पूर्वाचार्यों की श्री शिव सागर जी से वर्तमान आचार्यो की चरण रज से पवित्र धर्म नगरी सीकर में परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 58 वा वर्षायोग सीकर में करने हेतु मंगल पर्दापण 23 जुलाई को 36 साधुओं सहित (37पिच्छी )हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के साथ ,मुनि श्री हितेंद्रसागर श्री प्रभवसागर ,श्री चिंतनसागरश्री दर्शितसागर ,श्री प्रबुद्ध सागर, श्री मुमुक्षुसागर,श्री प्रणीतसागर,श्री ध्येयसागर श्री भुवन सागर,श्री गुणोदय सागर,आर्यिका श्री शुभमति,,श्री चैत्यमती, श्री विलोकमति,श्री दिव्यांशुमति , श्री पूर्णिमामति,श्री मुदितमति ,श्री विचक्षणमति श्री समर्पितमति ,श्री निर्मुक्त मति,श्री विनम्रमति ,श्री दर्शनामति,श्री देशनामति ,श्री महायशमति,श्री देवर्धिमति,श्री प्रणतमति,श्री निर्मोहमति,श्री पद्मयशमति श्री दिव्ययशमति,,श्री प्रेक्षामति,श्री जिनेशमति,ऐलक श्री हर्षसागर क्षुल्लक श्री प्राप्तिसागर ,क्षु श्री सुभग सागर , क्षु श्री सुगुप्त सागर जी क्षु श्री प्रतिज्ञा सागर जी37क्षुल्लिका श्री प्रदीप्त मति जीआचार्य श्री, 10 मुनिराज, 20 आर्यिका, 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक 1 क्षुल्लिका 36 साधु सहित 37 पीछी है

राग द्वेष मोह आत्मा पर लगे सबसे बड़े रोग हैं। इस कारण आप दुखी है।समता और साम्य भाव सबसे बड़ा धन है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

सीकर समाज ने काफी वर्षों तक प्रतीक्षा की नगर प्रवेश में अनेक चिकित्सालय और विद्यालय देखें ,चिकित्सालय में रोगों का इलाज और विद्यालय में लौकिक शिक्षा विद्या का अध्ययन कराया जाता है सर्व समाज रोगी है इलाज सभी चाहते हैं सबसे बड़ा रोग जन्म मरण का है यह रोग दूर करने के लिए सबसे बड़ा चिकित्सालय आचार्य संघ आपके नगर में आया है आपकी आत्मा पर कर्म बंध कारणभूत रोग है। सबसे बड़े 3 रोग राग द्वेष और मोह है इन्हें दूर करने के लिए ही आचार्य संघ आया है यह मंगल धाम देशना सीकर नगर में प्रवेश के अवसर पर श्री धर्मसागर सभागृह में आयोजित धर्म सभा में प्रथम दिवस आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। डा राजेश पंचोलिया विवेक पाटोदी के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि रोगदूर होने पर आत्मा सूखी होती है सभी का शरीर पर्याय बदलता है जिस प्रकार आप आत्मा के भाव परिणाम कर्म करते हैं उसके अनुसार आयु का बंध होता है अनेक की अल्पायु होती है। बालक, युवा वृद्धावस्था,जन्म मरण का चक्र चलता रहता है। सीकर हमारे दीक्षागुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि भूमि है। समाधि का अर्थ समता रूपी परिणाम होना ।सीकरवासी साक्षी है कि आचार्य श्री धर्म सागर जी के जीवन में कितनी, किस प्रकार की समता थी। समता ही सबसे बड़ा धन है साम्य भाव रूपी धन है आचार्य धर्म सागर जी में समता साम्यभाव रहा है ।संघ में अनेक साधु है सभी ज्ञानवान है ,सभी के उपदेश से ज्ञान का प्रसाद मिलेगा समाज में उत्साह, साहस और भक्ति होना चाहिए साधुओं के उपदेश मार्गदर्शन से अपने मनुष्य जीवन को सार्थक करने का प्रयास करें। समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि आचार्य संघ के मंचासीन होने पर चित्र अनावरण , दीप प्रवज्जलन, मंगलाचरण पश्चात आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य राजकुमार चंदा देवी भरतिया परिवार सीकर, जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य ऋषभ ,श्रीमती बबीता सेठी तथा महाआरती का सौभाग्य पूरणमल ,अजीत आशीष जयपुरिया परिवार सीकर ने प्राप्त किया।
अनेक समाधि स्थली
सीकर में आचार्य श्री 108धर्मसागर जी,आचार्य श्री विवेकसागर जी महाराज ,आर्यिका 105श्री विद्यामति सहित अनेक साधुओं की पूर्व वर्षों में समाधि हुई है ।
साधुओं जन्म नगरी
सीकर से पूर्व में अनेक भव्य आत्माओं ने संयम वैराग्य दीक्षा धारण कर अपने जीवन को कृतार्थ किया है जिसमें प्रमुख है आचार्य श्री से दीक्षित शिष्या नगर की श्रीमती भगवानी देवी जिनेंद्र जयपुरिया ने 2 नवंबर 2022 को महावीर जी में आर्यिका दीक्षा ली इसके पूर्व उन्होंने 4 अगस्त 2022 को महावीर जी में ही क्षुल्लिका दीक्षा भी आचार्य श्री से ली थी। संलेखना समाधि लेकर महावीर जी में 25 दिनों में मात्र तीन बार जल लेकर 25 नवंबर 2022 कोउनकी उत्कृष्ट समाधि आचार्य श्री के सानिध्य में हुई। नगर की दाखा देवी की पुत्री वरग देवी ने आचार्य श्री धर्म सागर जी से सन 1976 मुजफ्फरनगर में आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री चेतन मति बनी। इनके अतिरिक्त अनेको ने दीक्षा ली।

आचार्य श्री अजित सागर जी सहित अनेकों की दीक्षा स्थली
आचार्य श्री शिव सागर जी ने संवत 2018 सन 1961 में चातुर्मास कर श्री अजीत सागर जी को मुनि ,श्री सुपार्श्व सागर जी को क्षुल्लक श्री बुद्धिमती ,श्री जिनमती ,श्री राजुल मति,श्री संभव मति ,श्री आदिमती को आर्यिका तथा श्री श्रेयांश मति को क्षुल्लिका का दीक्षा सीकर में दी।
डा राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
