धर्म दिखावे का नहीं बल्कि आत्मानुभूति का विषय आत्मिक शांति के लिए करें ‘ॐ अर्ह नमः’ का जाप’ प्रणम्यसागर महाराज
मंदसौर
अर्हम योग प्रणेता मुनि श्री 108प्रणम्यसागर महाराज का 11 वर्ष बाद संघ सहित शहर में मंगल प्रवेश हुआ। रविवार को उनके आगमन पर सकल जैन समाज ने भव्य अगवानी की।
सुबह मुनिश्री का पद विहार बोतलगंज गांधी हर्बल से प्रारंभ हुआ। महावीर द्वार चौराहे पर समाजजनों ने बैंड-बाजों, ढोल तथा हाथी-घोड़ों के साथ स्वागत किया। पाद प्रक्षालन, पूजन व आरती के बाद शोभायात्रा तार बंगला जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में महिलाएं मंगल कलश लेकर जबकि युवा भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए मुनि संघ के साथ रहे। पूरे मार्ग को रंगोलियों से सजाया गया था। मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा में नन्हे बच्चों ने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया।
प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि आत्मिक उन्नति के लिए ‘ॐ अहँ नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए। यह मंत्र पंच परमेष्ठी और 24 तीर्थंकरों के स्मरण का माध्यम है तथा मानसिक और आत्मिक शांति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि धर्म दिखावे का नहीं, बल्कि आत्मानुभूति का विषय है।
धर्मसभा के प्रारंभ में चैत्या बड़जात्या, गर्वी जैन, प्रांजल जैन और पीहू जैन ने मंगलाचरण किया। आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर, भाजपा जिला महामंत्री विजय सुराणा, सकल जैन समाज अध्यक्ष लोकेंद्र जैन, महामंत्री शेखर कासमा सहित अतिथियों ने किया।
पाद प्रक्षालन का लाभ पं. विजयकुमार नेमकुमार समर गांधी परिवार को प्राप्त हुआ। महिला मंडलों की पदाधिकारियों ने मुनिश्री को शास्त्र भेंट किए। इस अवसर पर प्रवास समिति अध्यक्ष जयकुमार बड़जात्या, सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष अनिल जैन, मुनि सेवा समिति अध्यक्ष अरविंद मेहता, संजय दोषी, भूपेंद्र कोठारी, संजय कोठारी, विनोद जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। संचालन डॉ. चंदा भरत कोठारी ने किया।

अहँ योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम
मुनिश्री ने कहा कि पंच परमेष्ठी की पंच मुद्राओं के साथ अहँ योग का बीजारोपण मंदसौर से हुआ था। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ने की साधना है। उन्होंने बताया कि अहँ योग मानसिक शांति प्रदान करता है और ध्यान के बिना योग अधूरा है। भगवान आदिनाथ एवं भगवान बाहुबलि ने भी योग साधना के माध्यम से आत्मतत्व की अनुभूति और अनंत सुख प्राप्त किया था। अहँ योग हर आत्मा को परमात्मा की ओर उन्मुख करने का प्रभावी माध्यम है।

10 लाख लोग जुड़े
प्रवचन से पूर्व नमन जैन और चिन्मय कियावत ने प्रोजेक्टर के माध्यम से अहँ योग की 10 वर्षीय यात्रा की झलकियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि अहँ योग भारत सहित 14 देशों तक पहुंच चुका है और इससे 10 लाख से अधिक श्रद्धालु जुड़े हैं। अहँ योग के माध्यम से गौसेवा, चिकित्सा, समाजसेवा, धर्म सेवा, सेवा, शिक्षा और संस्कार जैसे अनेक प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
