कुछ चीजें सहज ही अपनी ऊर्जा प्रदान कर देती है, अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज।
कुशलगढ़ बांसवाड़ा राजस्थान
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा पुष्पगिरी की और चल रही है उसी श्रुंखला में आज कुशलगढ़ बांसवाड़ा राजस्थान में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि। जैसे_अग्नि के पास जाओ तो गर्माहट मिलती है,__बर्फ के पास जाओ तो शीतलता मिलती है,_फूलों के बगीचे में जाओ तो सुगन्ध मिलती है,_और उपवास करो तो आरोग्यता आपोआप मिल जाती है।_
महात्मा गांधी जी ने – उपवास को आत्मशुद्धि और सत्याग्रह का सबसे बड़ा शस्त्र माना था। हर मास एक उपवास – शरीर के लिए उतना ही जरूरी है, जितना आत्मा के लिए प्रार्थना। यह केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि इच्छाओं पर नियन्त्रण और आत्मसंयम का अभ्यास है।
उपवास जीवन की सर्वोषधि है। उपवास तीन प्रकार से कर सकते हैं —
[1] निर्जल उपवास — कुछ भी नहीं खाना, ना पीना।
[2] लिक्विड उपवास — जल, शिकंजी, य डाभ पानी, दिन में एक दो बार लेकर कर सकते हैं।
[3] फलाहार उपवास — एक कोई भी फल खाकर, जल आदि पीकर कर सकते हैं।
सद्गुरु [ईशा फाऊँडेशन] का कहना है कि – आपका शरीर और मस्तिष्क तभी सबसे अच्छा काम करता है, जब आपका पेट खाली हो।

देश के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जी – वर्षायोग में एक बार भोजन लेते हैं और तीनों नवरात्रा में उपवास करते हैं।हमारा स्वयं का अनुभव भी यही कहता है — हमने तीर्थराज सम्मेद शिखर पर्वत पर 557 दिनों में 496 दिन निर्जल उपवास किये और 61 दिन आहार ग्रहण किया। आहार में केवल – रागी, मूंगदाल, तीन हरी सब्जी, गुड़, चावल और खिचड़ी – इसके अलावा कुछ नहीं।
यह अनुभव बताता है कि संयम और उपवास से शरीर ही नहीं, मन और आत्मा भी अत्यंत शक्तिशाली बनती है।

उपवास केवल एक परंपरा नहीं.. यह आत्मबल, स्वास्थ्य और आत्मशुद्धि का दिव्य मार्ग है।अपनाइए — हर मास एक उपवास और जीवन को बनाइए स्वस्थ, संयमित और प्रकाशमय…!!
! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
