गुरुभक्ति व निःस्वार्थ सेवा की पराकाष्ठा को नमन अजैन ब्राह्मण परिवार की जिसने भक्ति का ऐसा प्रतिमान खड़ा किया जो सदियों तक याद किया जाएगा
भिलुड़ा
नमन कीजिए गुरु-भक्ति की उस पराकाष्ठा को, जिसने 21वीं सदी के इतिहास में नि:स्वार्थ सेवा का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। यह कहानी है दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति के गौरव, वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनंदी जी गुरुराज की और उस अजैन ब्राह्मण परिवार की, जिसने भक्ति का ऐसा प्रतिमान खड़ा किया जो सदियों तक याद रखा जाएगा।
राजस्थान के भिलुड़ा निवासी भट्ट परिवार के श्रीमान शैलेंद्र जी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सारिका जी भट्ट, विगत पाँच वर्षों से गुरुदेव से एक ही करुण प्रार्थना कर रहे थे—कि गुरुदेव एक बार उनके ‘शिव गौरी आश्रम’ को पावन कर दें। उनकी इस अटूट श्रद्धा और समर्पण को देखकर, आचार्य भगवन का संघ सहित सन 2025 में इस शांत, एकांत और प्राकृतिक सौम्यता से भरपूर आश्रम में वर्षायोग हेतु मंगल प्रवेश हुआ।

आचार्य श्री की अनवरत लेखन को गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड की मिली स्वीकृति
शैलेंद्र जी भट्ट के इसी नि:स्वार्थ सेवा के महान पुण्य से और प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. राजमल जी जैन के स्वैच्छिक प्रयासों से, आज संपूर्ण जैन जगत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण आया है। पूज्य आचार्य श्री कनकनंदी जी गुरुराज की 50 वर्षों से जारी अनवरत लेखन साधना का ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में नामांकन हेतु ऐतिहासिक स्वीकृति आ चुकी है।

400 कालजयी कविताएं एवं 12 से अधिक गहन साहित्यों का महासृजन
इस वार्षिक प्रवास में गुरुदेव की रत्नत्रय पूर्वक सहज साधना संपन्न हुई, जहाँ 400 कालजयी कविताएँ और 12 से अधिक गहन साहित्यों का महा-सृजन हुआ। इसी पावन धरा पर गुरु वंदना हेतु आचार्य श्री चंद्रगुप्त जी गुरुदेव सहित शिष्यों का आगमन हुआ, तो वहीं देशभर के अनेक वैज्ञानिक शिष्यों ने गुरु चरणों में आकर ज्ञानार्जन किया। भक्ति की महिमा देखिए! इस वर्षायोग को कराने वाले संजय जी दोसी ने इसी प्रवास में संसार का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा ली और मुनि श्री सामायिक सागर जी बने। इस पूरे वर्ष अलग-अलग परिवारों ने सेवा का अनुपम लाभ लिया—संजय जी-मैना जी परतापुर ने वर्षायोग में, निधिप कुमार और माँ खुशबू देवी ने शीतकाल में, तथा मुनि श्री सौम्य नंदी जी के पूर्वाश्रम परिवार (उदयपुर), विदुषी जैन परिवार (खोड़न) और उर्वशी जैन परिवार ने ग्रीष्मकाल में अपनी भक्ति समर्पित की। भट्ट परिवार के इस सेवा-यज्ञ में भिलुड़ा की समस्त दिगंबर जैन समाज के प्रत्येक श्रावक-श्राविकाओं ने तन-मन से अपना भरपूर सहयोग दिया।

पूरे प्रवास में कोई बोली प्रथा नहीं हुई ना ही कोई चंदा इकट्ठा हुआ
परंतु, इस पूरे वार्षिक प्रवास का सबसे वंदनीय, सबसे पवित्र और अचंभित कर देने वाला सत्य यह है कि गुरुदेव की सिंह-वृत्ति और प्रतिज्ञा के अनुसार—यहाँ पूरे एक वर्ष में न तो कोई याचना की गई, न कोई बोली प्रथा हुई, न कोई चंदा-चिट्ठा इकट्ठा किया गया और न ही किसी मंच या माला का आडंबर हुआ! बिना किसी प्रचार के, गुरुदेव की इस शुद्ध ज्ञान साधना का शंखनाद सात समंदर पार पूरे विश्व में गूँज उठा।

17 जून को गुरुदेव का मंगल विहार
अब वह घड़ी आ गई है जब दिनांक 17 जून को, पूज्य गुरुदेव का इस पावन शिव गौरी आश्रम, भिलुड़ा से पुनर्वास कॉलोनी,关गलियाकोट हेतु मंगल विहार होने जा रहा है। आइए, पूरे विश्व के सामने गुरु सेवा की सर्वोच्च मिसाल पेश करने वाले शैलेंद्र जी-सारिका जी भट्ट परिवार और भिलुड़ा समाज के इस नि:स्वार्थ सेवा पुरुषार्थ की हम सब अंतस से अनंत-अनंत अनुमोदना करते हैं।शाह मधोक जैन, चितरी श्री राष्ट्रीय जैन मित्र मंच, भारत से प्राप्त आलेख
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
