जब लालबहादुर शास्त्री ने देशभूषण आचार्य से लिया था आशीर्वाद जैन इतिहास का गौरवमयी इतिहास,
यह पल दिनांक 28 नवम्बर 1965 के है स्थान था ऐतिहासिक लाल किला मैदान अवसर था आचार्यरत्न श्री 108 देशभूषण जी महाराज विद्यालंकार का जन्मदिवस समारोह का
उक्त अवसर पर एक विशाल पाण्डाल मे इस समारोह के मुख्य अतिथि थे “जन जन के प्यारे प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी। कोई 40-50 हजार की जनता थी। यह दौर भारत-पाक युद्ध के तुरंत बाद का था। जब शास्त्री जी अपनी भावाञ्जली समर्पित करने उठे तो भावुक हो गये। 
भावुक पल
आचार्य श्री ने शास्त्री जी के सिर पर हाथ रखा कर कहा “आप अपनी जिन्दगी के आखिरी पल तक देश सेवा करते रहेंगे।”
राष्ट्रीय सुरक्षा कोष मे सहायता की बात आयी तो समाज के मर्दों ने अपनी अंगुठी, गले की चैन उतार कर दे दी औरतों ने अपने सारे आभूषण उतार कर दे दिये। नोटों की तो मानो वर्षा होने लगी। असंख्य वीर भामाशाह पैदा हो गये। 

फिर चरण छु कर आशीर्वाद लिया और समाज को हार्दिक धन्यवाद दिया।
जैन धर्म से जुड़ाव: आचार्य देशभूषण जी महाराज भारत के एक महान दिगम्बर जैन संत और प्रकांड विद्वान थे। शास्त्री जी द्वारा इस कार्यक्रम में शामिल होकर जैन संतों का सम्मान करना, भारत की सर्वधर्म समभाव और सांस्कृतिक एकता की एक अद्भुत मिसाल थी
यह इस बात का द्योतक है कि हमारे जैन सन्तो ने यदि देश पर कोई संकट आया तो जैन संत जैन समाज कभी पीछे नहीं रहा है। निश्चित रुप से यह अविस्मरणीय पल कहे जाएंगे जो इतिहास के पन्नों पर अमर हो गए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
