धर्मतीर्थ में दो आचार्यों का भव्य मंगल मिलन, आगमोक्त विधि से हुआ स्वागत

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धर्मतीर्थ में दो आचार्यों का भव्य मंगल मिलन, आगमोक्त विधि से हुआ स्वागत

औरंगाबाद/धर्मतीर्थ।

 धर्मतीर्थ क्षेत्र पर उस समय आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया, जब आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव ससंघ ने आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज का आगमोक्त परंपरा के अनुसार भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। 

 

 

 

आगमन पर संपूर्ण संघ ने आचार्य श्री की तीन परिक्रमा लगाकर नमोस्तु-प्रतिनमोस्तु किया तथा श्रद्धा एवं भक्ति का अनुपम दृश्य उपस्थित हो गया।

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इस अवसर पर आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी ने आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव को आत्मीयता से गले लगते हुए अपने वात्सल्य एवं धर्मप्रेम का परिचय दिया। धर्मतीर्थ क्षेत्र के पदाधिकारियों एवं श्रद्धालुओं ने भी दोनों आचार्यों का भावपूर्ण स्वागत किया।

 

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कार्यक्रम में आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव द्वारा आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी का पंचामृत द्रव्यों से पादप्रक्षालन किया गया। तत्पश्चात संपूर्ण संघ द्वारा आचार्य वंदना की गई। धर्मतीर्थ साम्राज्य नायक भगवान शांतिनाथ के भव्य महामस्तकाभिषेक एवं सहस्रफणी भगवान पार्श्वनाथ के 108 फणों से होने वाले दिव्य अभिषेक के दर्शन कर उपस्थित साधु-साध्वी एवं श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

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धर्मतीर्थ क्षेत्र एवं संभाजीनगर में प्रस्तावित चातुर्मास हेतु आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी को श्रीफल भेंट कर मंगल निवेदन किया गया।

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ऐसा प्रतीत होता है मानो साक्षात आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज धर्मतीर्थ पधारे हों। आचार्य गुप्तीनंदी गुरुदेव 

 

अपने उद्बोधन में आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव ने कहा कि आगम एवं सिद्धांत के प्रकाण्ड ज्ञाता आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी का धर्मतीर्थ पर आगमन हम सभी के लिए सौभाग्य का विषय है। उनके दर्शन कर हम स्वयं को धन्य अनुभव कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो साक्षात आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज धर्मतीर्थ पधारे हों।

 

 

यह क्षेत्र समस्त जीवों के कल्याण का केंद्र है। आचार्य सिद्धांतसागर 

वहीं आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी ने धर्मतीर्थ क्षेत्र की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि यह क्षेत्र समस्त जीवों के कल्याण का केंद्र है। आचार्य कुंदकुंद देव द्वारा समयसार में प्रतिपादित चारों अनुयोगों का सजीव स्वरूप यहां प्रत्यक्ष दिखाई देता है। क्षेत्र में जीवदया, करुणा, अहिंसा एवं धर्म की प्रभावना निरंतर हो रही है। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारी राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव का व्यक्तित्व एवं धर्मप्रभावना अद्वितीय है।

इस अवसर पर 18 पिछीधारी साधु-साध्वियों का निरंतराय आहार सम्पन्न हुआ। दोनों आचार्यों के सान्निध्य में गहन तत्वचर्चा एवं धर्मचर्चा भी आयोजित हुई, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक पक्ष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

 

 

 धर्मतीर्थ क्षेत्र के प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल, औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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