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कभी राष्ट्रद्रोह मत करना, भीख मांगकर पेट भर लेना, देश से गद्दारी करने वाले को कभी माफी नहीं मिलती सुधासागर महाराज 

धर्म

कभी राष्ट्रद्रोह मत करना, भीख मांगकर पेट भर लेना, देश से गद्दारी करने वाले को कभी माफी नहीं मिलती सुधासागर महाराज

शाड़ोरा

संसार में अगर कोई सबसे बड़ा पापी है, तो वह है जो अपनी ही योग्यता को नष्ट कर देता है। जिंदगी में चाहे कितने ही कष्ट और संकट आ जाएं, अपनी एबिलिटी (योग्यता) से कभी समझौता मत करना। आपके भीतर देश का राष्ट्रपति बनने तक की सामर्थ्य है, बशर्ते आप उस योग्यता को जिंदा रखें। इसके साथ ही जीवन का दूसरा बड़ा नियम याद रखना कभी राष्ट्रद्रोह मत करना। भीख मांगकर पेट भर लेना मंजूर है, लेकिन अपने देश से गद्दारी करने वाले को सृष्टि में कभी माफी नहीं मिलती। यह ओजस्वी विचार प्रखर – संत परम पूज्य तीर्थ चक्रवर्ती मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने शाढ़ौरा के पार्श्वनाथ धाम में आयोजित भव्य धर्मसभा में व्यक्त किए।

 

 

 

मुनि श्री के मुखारविंद से निकले इन सूत्रों को सुनने के लिए नगर सहित समूचे अंचल से हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ाधर्मसभा की शुरुआत में मध्य प्रदेश जैन महासभा के संयोजक विजय धुर्य ने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के पावन कदम इस धरा पर पड़े हैं, इसलिए आज से इस जिनालय का नाम पार्श्वनाथ धाम होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए जैन समाज के सर्वोच्च महातीर्थ सम्मेद शिखर जी एवं अष्टापद से विशेष रूप से लाई गई पवित्र माटी को मंगल कलशों में भरकर स्थापित किया गया। मुख्य कलश आर्थिका मुदितमति माता जी के परिजन महेश कुमार और मनोज कुमार चौबे परिवार ने स्थापित किया। अन्य विशिष्ट कलश जैन समाज अध्यक्ष डॉ. भरत जैन, मुनि श्री निकलंक सागर जी महाराज के परिजन सुदीप जैन व संदीप जैन एवं भीलवाड़ा परिवार सहित सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के बीच कलश नींव में स्थापित किए। सभी परिवारों का सम्मान समाज के अध्यक्ष भरत जैन, मंत्री दिनेश टरका और कोषाध्यक्ष राकेश हलवाई द्वारा किया गया।

 

 

द्रौपदी के ‘अक्षय पात्र’ जैसा चमत्कारी है भोजन का यह नियम

मुनि श्री ने कहा आज के दौर की खान-पान पद्धतियों पर प्रहार करते हुए भोजन और स्वास्थ्य का एक बड़ा वैज्ञानिक रहस्य साझा किया। अन्नपूर्णा सिद्धि का फॉर्मूले को बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि घर के पूज्य और वरिष्ठ मर्यादा पूर्वक सबसे पहले भोजन ग्रहण करते हैं और उसके बाद परिवार के बाकी सदस्य बैठते हैं, तो उस घर में अन्नपूर्णा की सिद्धि हो जाती है। फिर चाहे कितने ही मेहमान आ जाएं, भोजन कम नहीं पड़ेगा। महाभारत काल में द्रौपदी भी यही करती थी, जिससे उसका पात्र कभी खाली नहीं होता था। इस ट्रेडिशनल लाइफस्टाइल को अपनाने से व्यक्ति को कभी संग्रहणी (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम/पाचन विकार) जैसी गंभीर बीमारी नहीं होगी।

 

पाप के उदय का अलर्ट है बिल्ली का रास्ता काटना

आज के प्रदूषित वातावरण और मानसिक तनाव से बचने का अचूक नुस्खा देते हुए मुनि श्री ने कहा कि जीवन में दुख के दो कारण हैं-बाहरी और अंतरंग। बाहरी को हम बदल नहीं सकते, लेकिन आंतरिक को पूरी तरह कंट्रोल कर सकते हैं। सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले मुख से ऊं नमः सिद्धेभ्य’ का जाप करें। जैसे पुराने समय में राजाओं को जगाने के लिए सुबह-सुबह मंगल गीत गाए जाते थे ताकि उनका पूरा दिन शुभ रहे, वैसे ही अपने दिन की शुरुआत पॉजिटिव वाइब्स के साथ करें। रास्ते में पानी से भरा कलश लिए महिला दिख जाए तो वह अच्छा शकुन है। वहीं अगर बिल्ली रास्ता काट दे, तो वह कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि आपके पुराने पाप कर्म के उदय होने का ‘अलर्ट’ (संकेत) है। ऐसे संकेत मिलते ही इंसान को तुरंत संभल जाना चाहिए और शुभ कार्यों में लग जाना चाहिए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगं

जमंडी 9929747312

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