महापुरुषों का दिव्य स्वरूप अलौकिक होता है पुण्यवान व्यक्ति भी उन्हें प्रभावित नहीं कर सकता-अविचल सागर जी महाराजभगवान महावीर जन्म जयंती पर होंगे अनेक आयोजन 

धर्म

महापुरुषों का दिव्य स्वरूप अलौकिक होता है पुण्यवान व्यक्ति भी उन्हें प्रभावित नहीं कर सकता-अविचल सागर जी महाराजभगवान महावीर जन्म जयंती पर होंगे अनेक आयोजन 

अशोक नगर-

जो देवता होते हैं जो पुण्य पुरुष होते हैं जिनका अंत:करण अनेक रिद्धिओ से सम्पन्न होते हैं ।जिनका दिव्य स्वरूप हम सब को दिखाई नहीं देता। ऐसे महापुरुषों का दिव्य स्वरूप अलौकिक होता है, पुण्यवान व्यक्ति भी उन महा पुरुषो को प्रभावित नहीं कर सकता। हम सब जो धर्म करते हैं वह पाप काटने और पुण्य की प्राप्ति तक सीमित रहता है हमें इससे आगे बढ़ने की आवश्यकता है उक्त आश्य के उदगार सुभाषगंज जैन मंदिर में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने व्यक्त किए ।

 

 

*महावीर जन्म जयंती की व्यापक तैयारियां को कैसे बहुत सुंदर बनाया जा सके इस हेतु अपने सुझाव हमारी पंचायत कमेटी तक पहुंचाएं जिससे कि आपके सुझावों को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शामिल किया जा सके।

*अहिंसा धर्म पाप काटकर पुण्य पाने से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है*

उन्होंने कहा कि अहिंसा धर्म पाप काटने और पुण्य पाने के लिए नहीं है यह तो आप सब जगह प्राप्त कर सकते हैं। पाप का विनाश हो और पुण्य की प्राप्ति हो आप कर सकते हैं लेकिन इससे आगे बढ़ कर इस जन्म-मरण से हमेशा के लिए मुक्त होने के लिए कुछ अलग करना पड़ेगा और इसके लिए आपको अपने आप के करीब आना होगा। अपने अंदर कुछ ऐसे गुण प्रकट करने होगा जो तुम्हारे अंदर ही विद्यमान है हमने उन्हें पहचान नहीं रहे है। मैं यह नहीं कहा रहा कि यह एक दिन में हो जायेगा पांच वर्ष दस वर्ष कुछ भी सही लेकिन इसके लिए हमें उन गुणों को पहचानना होगा। माता संवरी जिसका का उल्लेख आज से पांच हजार साल पहले लिखे गए हर ग्रन्थ में मिलता है जंगल में रहने वाली एक असहाय जिसके पास आप जैसा वैभव नहीं था, साधन, धन-सम्पत्ति नहीं थी उसे पता भी नहीं था कि इस जीवन में वह जो चाहे रहीं हैं उसे कभी मिलेगा की नहीं ।उसने कोई शास्त्र पुराण ग्रन्थ नहीं पड़े थे फिर भी अपने एक गुण के कारण मर्यादा पुरूषोत्तम श्री रामचन्द्र जी उसकी कुटिया तक पहुंचते हैं और उसके जीवन को धन्य कर देते हैं। तो ऐसे गुण हम अपने अंदर प्रकट करें इसमें ना धन-दौलत पैसे अभिमान अहंकार की जरूरत पड़ेगी बस अपने जीवन में ऐसा गुण पाना होगा जिससे हम अपने आप को पवित्र और पावन वना सके।

आपने कभी सपना देखा कि मेरे अंदर सरलता सहजता मृदुता होना चाहिए

उन्होंने कहा कि हम लोग शब्द को बोलते हैं कि मेरा कल्याण हो मेरी उन्नति हो हम कभी एक शब्द की ओर जाते हैं मैं गुणवान वनु तुम्हारा दिमाग कहा कि मैं गुणवान वनु ये अंदर से आवाज आना चाहिए जिन शासन में एक चीज है जिसको जरा भी मेरे वारे में भनक लग गई है वह गुण वान वने तुम अपने भोग की अभिलाषा को सुख की कामना करते हुए पुण्य की प्राप्ति करने का ही लक्ष्य मत रखो आपने कभी सपने देखा कि मेरे अंदर सरलता होने चाहिए मुझमें दया होना चाहिए मेरे अंदर मृदुलता होने चाहिए इन‌गुणो को प्रकट करने की दिशा में क़दम तो बढ़ाओ फिर तुम्हें किसी की भी जरूरत नहीं पड़ेगी सब अपने आप होता चला जायेगा

        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *