घर में धर्म और संस्कार न हों तो जीवन अधूरा : स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
अतिशय क्षेत्र में आयोजित शास्त्री परिषद के शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर में भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105स्वस्तिभूषण माताजी ने बच्चों में संस्कार और ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। माताजी ने कहा कि बच्चों को बचपन से भाव और ज्ञान की घुट्टी देनी चाहिए। केवल द्रव्य-ज्ञान से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि घर में आधुनिक सुख-सुविधाएं न हों तो भी चल सकता है। यदि घर में धर्म और संस्कार न हों तो जीवन अधूरा रह जाता है। मनुष्य को भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागने के बजाय ज्ञान-प्राप्ति के प्रयास करने चाहिए। माताजी ने कहा कि यदि बच्चों को केवल भौतिक संसाधनों से जोड़ा जाएगा, भाव से नहीं जोड़ा जाएगा तो सब व्यर्थ हो जाएगा। बच्चा बड़ा होकर धर्म से दूर होने लगता है। 


उन्होंने विद्वानों से कहा कि जैसे जमीन के भीतर पानी विद्यमान रहता है। वैसे ही हमारे भीतर भी ज्ञान मौजूद है। ज्ञानावरणी कर्म के प्रभाव से वह ढका रहता है। इसे जागृत करने के लिए पुरुषार्थ और परिश्रम की आवश्यकता होती है।


उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सौ बुझ चुके दीपकों के बीच यदि एक जला हुआ दीपक रख दिया जाए, तो वह अकेला दीपक सभी दीपकों को प्रकाशित कर सकता है। इसी प्रकार ज्ञान से व्यक्ति स्वयं भी प्रकाशित होता है। दूसरों को भी मार्ग दिखाता है। माताजी ने कहा कि संसार की वस्तुएं क्षणिक संतुष्टि देती हैं। कितना भी भोजन कर लें, कुछ समय बाद फिर भूख लगती है। कितना भी पानी पी लें, फिर प्यास लग जाती है। आत्मा की वास्तविक तृप्ति केवल ज्ञान से होती है। जिस दिन आत्मा को ज्ञान-रूपी भोजन और जल मिल जाएगा, उसी दिन वह संतुष्ट हो जाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
