Smiling man in a white cap speaks into a microphone during a public address with a vintage setup.

चौधरी चरण सिंह भारत देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे जो कभी संसद भवन नहीं गए उनकी पुण्यतिथि पर विशेष

राजनीति

चौधरी चरण सिंह भारत देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे जो कभी संसद भवन नहीं गए उनकी पुण्यतिथि पर विशेष

भारत देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है इस लोकतंत्र की बड़ी विचित्रताएं हैं जो कुछ अनकही हैं और इतिहास के पन्नों पर अंकित है क्या आपको पता है भारत देश में कैसे प्रधानमंत्री भी हुए हैं जो कभी संसद भवन नहीं गए जी हांभारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे जो अपने पूरे कार्यकाल के दौरान कभी संसद भवन नहीं गए।

 

जुलाई 1979 में वे देश के पांचवें प्रधानमंत्री बने थे। उनके कार्यकाल के दौरान संसद का कोई भी सत्र नहीं बुलाया गया था, जिसके कारण वे एक भी दिन संसद का सामना नहीं कर सके। इससे पहले कि संसद का सत्र शुरू हो पाता, बहुमत साबित करने से ठीक पहले इंदिरा गांधी की पार्टी ने उनसे समर्थन वापस ले लिया, और उन्हें मात्र 23 दिन के भीतर इस्तीफा देना पड़ा।

श्री चौधरी चरण सिंह से जुड़ा एक किस्सा जब थाने में किसान बनकर पहुंचे थे PM, रिश्वत भी दी थी, पूरा थाना हो गया था सस्पेंड… चौधरी चरण का मशहूर किस्सा
देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को मेकेंद्र सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है किसानों के लिए हर वक्त खड़े रहने वाले चौधरी चरण सिंह के कई किस्से आज भी लोगों को याद हैं. वह अक्सर किसानों की समस्या सुनने और सरकारी दफ्तरों में भी मुआयना करने चले जाते थे.

Promotional collage advertising astrological advice, featuring a woman's portrait on the left, a decorative lit diya with rose petals on the right, and bold text including the phone number 6377240323.Promotional poster for Navin Jain Print Gallery with Buddha statues, devotional pictures, and printing equipment; includes contact numbers and Hindi text.

पश्चिमी यूपी से किसान नेता से लेकर देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने तक का चौधरी चरण सिंह का सियासी सफर बहुत दिलचस्प रहा है. 28 जुलाई, 1979 से 14 जनवरी, 1980 तक वह प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहे. किसानों के लिए हर वक्त खड़े रहने वाले चौधरी चरण सिंह के कई किस्से आज भी लोगों को याद हैं. ऐसा ही एक किस्सा 25 साल पहले का है, जिसका जिक्र हम यहां कर रहे।

जब किसान बनकर पहुंचे थे पुलिस थाने
साल 1979 की बात है जब शाम के वक्त एक परेशान किसान यूपी के इटावा जिले के उसराहार थाने में पहुंचा. किसान ने पहले इधर-उधर नजर दौड़ाई और फिर झिझकते हुए हड कांस्टेबल के पास पहुंच गया. इस दौरान हेड कांस्टेबल आराम फरमा रहा था और जैसे ही उसने नजर घुमाई तो सामने मैले-कुचैले कपड़े और धोती पहने एक किसान खड़ा था जिसके पैर में चप्पल भी नहीं थे. कांस्टेबल ने किसान से पूछा, “हाँ, क्या बात हो गई?”

इस पर किसान ने डरते और सकुचाते हुए हुए बताया कि वह मेरठ से अपने रिश्तेदार के यहां बैल खरीदने आया है लेकिन रास्ते में एक जेबकतरे ने उसकी जेब काट ली और पैसे चुरा लिये, इसलिए वह शिकायत लिखवाने के लिए पुलिस थाना में आया है. हेड कांस्टेबल ने नजरें टेढ़ी करते हुए पूछा, ‘मेरठ से बैल खरीदने इतनी दूर क्यों आये भाई? क्या आपके पास इस बात का कोई सबूत है कि आपकी जेब काट ली गई है? हो सकता है कि आपके पैसे कहीं गिर गए हों या इसका कोई सबूत है कि किसी ने आपकी जेब काट ली हो, आपके पैसे कहीं गिर गए हों, या आपने पैसे खाने-पीने में उड़ा दिए हों और अब घरवाले के डर से चोरी करने का नाटक कर रहे हों?’ अंत में कांस्टेबल ने कहा, ‘जाओ शिकायत नहीं लिखी जाएगी।

मुंशी भी रह गया था हैरान

पुलिस कांस्टेबल के इस व्यवहार से किसान निराश और परेशान हो गया और हताश होकर एक किनारे पर खड़े होकर सोचने लगा कि अब क्या होगा.. तभी एक सिपाही ने उसे बुलाया और कुछ बातचीत की. बातचीत में यह तय हुआ कि अगर किसान कुछ पैसे (घूस) का जुगाड़ कर ले तो उसकी रिपोर्ट लिखी जाएगी. परेशान किसान ने पुलिस के इस ऑफर को मान लिया. इसके बाद मुंशी ने शिकायत लिखनी शुरू कर दी. सारी बात लिखने के बाद मुंशी ने कहा, ‘बाबा, हस्ताक्षर करोगे या अंगूठा लगाओगे?’ किसान ने कहा, ‘मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं, इसलिए अंगूठा लगाऊंगा.’ मुंशी ने किसान की ओर कागजऔर स्याही का पैड बढ़ा दिया.

हताश और परेशान दिख रहे किसान ने अपनी जेब में हाथ डाला और एक मुहर और कलम निकाली. इससे पहले की मुंशी कुछ समझ पाता कि किसान ने स्याही के पैड से मुहर पर स्याही लगाई और कागज पर ठप्पा लगा दिया. मुंशी ने कागज पलटकर पढ़ा, उस पर मुहर लगी थी, ‘प्रधानमंत्री भारत सरकार.’ मुंशी को आश्चर्य हुआ कि किसान ने हाथ में कलम लेकर लिखा था चरण सिंह. अब थाने में हड़कंप मच गया. पूरा थाना इस बात से हैरान था कि देश के पीएम चौधरी चरण सिंह एक किसान का भेष धारण कर थाने में रिपोर्ट लिखवाने आए थे. इसके बाद पूरे थाने को निलंबित कर दिया गया.

खुद हकीकत जानने निकल जाते थे चरण सिंह

दरअसल जब चरण सिंह पीएम बने तो किसानों, गरीबों और मजदूरों पर पुलिसिया जुल्म के कई मामले सामने आते थे और घूसखोरी भी काफी प्रचलन में थी. बार-बार शिकायत मिलने के बाद चरण सिंह खुद ही हकीकत भांपने के लिए किसान का भेष धारण कर थाने पहुंच गए थे. कई पूर्व नेता बताते हैं कि चौधरी चरण सिंह कभी भी भेष बदलकर पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों का निरीक्षण करने पहुंच जाते

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *