रीवा में हुई दुर्घटना के दोषी असामाजिक तत्वों को दंडित किया जाए*lसाधुओं के प्रभाव, संयम, त्याग, व आशीष से शांति का वातावरण —-आचार्य विशद सागर महाराज
पदमपुरा /जयपुर,27 मई।
परम पूज्य दिगंबर आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज संघ सहित पदमपुरा, जयपुर में विराजमान हैं। प्रातः कालीन दिनचर्या में आचार्य श्री जाप,पूजा, अभिषेक व विश्व शांति के लिए शांति धारा कराई। 27 मई को प्रातः 7:00 बजे संजय ठोलिया संयुक्त मंत्री मन्दिर प्रबन्ध समिति व संयोजक मुनि व्यवस्था समिति,गायत्री नगर जयपुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल आचार्य श्री के दर्शन कर पाद् प्रक्षालन किया।
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने मध्य प्रदेश रीवा में हुई घटना के क्रम में चिंता प्रकट करते हुए आचार्य श्री से चर्चा की, आचार्य श्री ने कहा कि जैन सिद्धांत सबसे प्राचीन, शांति प्रिय धर्म है। प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से भगवान महावीर तक तीर्थंकरों ने निर्गंथ रहकर, श्रमण बनकर, व्रतों को धारण कर अपने कर्मों का नाशकर मोक्ष प्राप्त किया, उसी क्रम में वर्तमान साधु,आचार्य, आर्यिकायें इसी मार्ग पर निर्गंथ रहकर अपनी साधना कर रहे हैं. संतों की सुरक्षा व्यवस्था,जीवन, श्रावकों व सरकारों के हाथ में है। प्रशासन अल्पसंख्यकों के लिए संरक्षण प्रदान करें।



असामाजिक व गलत कार्य करने वाले को सरकार दंडित करें ताकि रीवा मध्य प्रदेश जैसी घटनाएं नहीं हो पाए।
श्रावकों का कर्तव्य है कि प्रशासन को साधु संतों के विहार आदि के समय सूचित करे, प्रशासन साधुओ की सुरक्षा करे। श्रावक साधु संतों के आहार विहार का ध्यान रखे, उनके जीवन की रक्षा, संरक्षण करें,साधु अपने शांति प्रिय तरीके से अपनी साधना,संयम, त्याग , निर्गंथ रहकर कर रहे हैं उनके आशीष से ही आज शांति का वातावरण है।


अंत में उपस्थित संजय ठोलिया, उदयभान जैन, अनिल पोलक्या आदि एवं पदमपुरा मंदिर जी में उपस्थित श्रावक व श्राविकाओं को,प्रथम अभिषेक व शांति धारा करने वाले श्रेष्ठियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
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प्रेषक– उदयभान जैन जयपुर मो…. 94143-06696
