गणिनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी के स्वास्थ्य लाभ हेतु मुनि श्री सुधासागर महाराज के सानिध्य सभी शिविराथियों ने की शांतिधारा एवं स्वस्थ होने की की कामना
अशोकनगर
एक ऐसी उत्कृष्ट साधिका गणिनी आर्यिका 105 ज्ञानमति माताजी जो जैन जगत का गौरव है उन्होंने अनेक ग्रंथों एवम पूजन विधानों की रचना की है। यहां तक कि वर्ष 2018 का यदि इतिहास देखा जाए तो माताजी जब खुरई नगर में आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज के दर्शन हेतु गई थी तब आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने कहा था कि आप मेरी बड़ी बहन हैं उन्होंने यह भी कहा था कि हस्तिनापुर जैसे कई तीर्थ अपने बनाए हैं ऐसा एक तीर्थ बुंदेलखंडी को भी दे दो।
आज वह अस्वस्थ है लेकिन अस्वस्थ होने के बावजूद भी माताजी अपनी पूरी साधना कर रही हैं इतनी उम्र में भी यह अपने आप में त्याग तपस्या का एक उदाहरण है। आज संपूर्ण विश्व उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना हेतु जाप कर रहा है। और भावना भा रहा है कि माताजी जल्दी स्वस्थ हो।
इसी कड़ी में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधासागर महाराज सानिध्य में सभी शिविरार्थियों ने उनके सानिध्य में शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए शांतिधारा की। शांतिधारा के पूर्व मुनि श्री ने भावुक शब्दों में उद्बोधन देते हुए कहा कि सर्वश्रेष्ठ सर्वज्येष्ठ आर्यिका ज्ञानमती माताजी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है सभी शिविरार्थि यह भावना भाए कि माता जी की अंतिम श्वास तक चेतना बनी रहे, अंतिम श्वास तक वे स्वस्थ रहे और जैसी उन्होंने धर्म की प्रभावना की है। ऐसा सारा जगत उनसे शिक्षा ले 


महाराज श्री ने कहा माताजी बहुत ज्ञानवान, चारित्रवान, बहुत प्राचीन आर्यिका ज्ञानमति माताजी बहुत सारे विधान ग्रंथ लिखे सभी शिविरार्थि जम्बूदीप तीर्थ की स्थापना करता सभी शिविरार्थि भावना भाए आर्यिका ज्ञानमति माताजी अयोध्या में विराजमान है वे स्वस्थ रहें और चेतनता जागृति पूर्ण बनी रहे भावना भाते है वो निरोग हो, स्वस्थ हो, आरोग्य हो चैतन्य रूपी हो ऐसी भावना है
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312



