“`~जैन आर्यिकाओं की रोड दुर्घटना समाधिमरणमामला“~
जैन समाज ने मौन जुलूस निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया
जो एक चींटी को भी मारने का भाव नहीं करता, ऐसे साधु की हत्या सम्पूर्ण मानवता की हत्या -मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी
रामगंजमंडी .
.सोमवार को मुनि श्री108 निष्पक्ष सागर एवं मुनि निस्पृह सागर महाराज की प्रेरणा से सकल जैन समाज रामगंज मंडी ने विगत दिनों रीवा (मध्य प्रदेश) में दो आर्यिका माताजी की सड़क एक्सीडेंट में हुई असामयिक समाधि के विरोध में मौन जुलूस निकाल कर प्रशासन को ज्ञापन दिया एवं आरोपियों को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की गई।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष एवं बच्चे शांतिनाथ मंदिर से रैली बनाकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और पुलिस उपअधीक्षक को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में मांग की गई कि इस पूरे मामले की जांच निष्पक्ष रूप से की जाए और जैन साधु संतों के विहार की ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि आगे से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो। भारत सरकार के गृह मंत्री, राजस्थान सरकार के मुख्य मंत्री एवं जिला कलेक्टर से मांग की गई कि ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाए कि साधुओं के ऊपर कोई भी अनायास हमला ना करे । ज्ञापन में मांग की गई कि भारतवर्ष में जगह जगह विहार कर रहे जैन साधु संतों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए।

समाज बंधुओ में जमकर आक्रोश फूटा
इस दुर्घटना से संपूर्ण जैन समाज एवं रामगंजमंडी जमकर आक्रोश था और जो पुलिस थाना जाकर फूटा इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भीषण गर्मी के प्रकोप में भी बच्चों बुजुर्गों एवं महिला शक्ति ने इसकी परवाह नहीं की और अपना विरोध दर्ज कराया
इस विरोध रैली में सकल जैन समाज मौजूद रहा ज्ञापन में साधु संतों की सुरक्षा के साथ एक विशेष विभाग बनाने की भी मांग की गई ज्ञापन का वाचन धर्मेंद्र लुहाड़िया ने किया।


इस अवसर पर मुनि श्री निष्पक्ष सागर ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन मुनि इसलिए पद विहार करते हैं क्योंकि वो जीवो की रक्षा करना चाहते हैं।वो नहीं चाहते कि हमारे पैरों से एक चींटी का भी घात हो। ऐसे मुनियों को भी गाड़ी से एक्सीडेंट कर कुचल दिया जाए तो इससे बड़ी मनुष्यता की हत्या नहीं हो सकती। मुनि श्री ने कहा कि जैन समाज अहिंसक जरूर है किंतु जब मुनियों की रक्षा के लिए आगे आना पड़ेगा तो हम कायर बन कर नहीं बैठेंगे। मुनि श्री ने कहा कि संतो की रक्षा के लिए संतो को ही आगे आना पड़ रहा है यह हमारी समाज की बहुत बड़ी कमजोरी है।


मुनि श्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में समाज का भी बहुत बड़ा दायित्व है। वो मुनियों की रक्षा करने के लिए सदैव तैयार रहे।
मुनि श्री ने कहा ऐसी घटनाएं फिर से ना घटे, इस हेतु दिगम्बर और श्वेतांबर दोनों समाज को एक जुट होकर ठोस निर्णय लेने की जरूरत है। मुनि श्री ने कहा साधु संत रोज रोज नगर में नहीं आते , यदा कदा आते है। इसलिए साधुओं के साथ विहार में चलने को अपना सौभाग्य समझना चाहिए।
मुनि श्री निस्पृह सागर ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन मुनियों का जीवन ऐसा होता है कि उन्हें देख कर पशु भी अपनी क्रूरता छोड़ कर अहिंसक हो जाते हैं और आज ऐसे ही मुनियों की हत्या करने के क्रूर परिणाम कुछ लोगों के हो जाते हैं । यह विचारणीय प्रश्न है।
मुनि श्री ने कहा विहार में चलने वाले श्रावकों की कमी आ गई है उनके लिए चौका आदि लगाने का समय हमारे पास नहीं है इसी कारण आज ऐसी घटनाएं घटित हो रही है।
साधु चलते फिरते तीर्थ माने गये हैं एक साधु की हत्या,एक तीर्थ को नष्ट करने जितना बड़ा पाप है। साधुओं का मरण केवल समाधि पूर्वक ही होता है। असामयिक रूप से साधु का मरण जैन दर्शन में अच्छा नहीं माना गया है। अतः ऐसी स्थितियों के लिए पूरा समाज जिम्मेदार है।
धर्म सभा में बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे भी मौजूद थे।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
