कोटा कलेक्टर का ज्ञापन लेने ना आना अहिंसक एवं मौन प्रदर्शन का अपमान : शशांक सिंघई ‘व्याकरणाचार्य’
कोटा
गत 20 मई को रीवा नगर में कार की टक्कर से दो जैन साध्वियों की समाधि हुई, दुर्घटना के सीसीटीवी फुटेज में इरादतन हत्या प्रतीत हो रही है, ऐसी वीभत्स दुर्घटना को देखकर भी जैन समाज द्वारा सम्पूर्ण भारत में मौन जुलूस के साथ विरोध दर्ज कराने तथा कार्यवाही में स्फूर्ति लाने हेतु 25 मई 2026, सोमवार प्रातः 09:30 बजे ज्ञापन देना निर्धारण हुआ।
सम्पूर्ण भारत के साथ हमारे कोटा नगर में भी सकल जैन समाज द्वारा भी अपना विरोध दर्ज करवाने हेतु सर्किट हाउस से कलेक्ट्रेट ऑफिस तक विशाल जन समूह के साथ ‘मौन रैली’ निकालकर माननीय कलेक्टर महोदय को त्वरित कार्यवाही एवं साधुओं की सुरक्षा रूप मांगों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति महोदय, माननीय लोकसभा अध्यक्ष, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देने पहुंचे, ताकि पदविहार करने वाले साधुओं को पर्याप्त सुरक्षा मिले और भविष्य में इस तरह की अवांछनीय दु:खद घटना न हो।

माननीय कोटा कलेक्टर का दायित्व था कि ऐसे संवेदनशील समय में वे अपनी मुलायम कुर्सी को छोड़कर कुछ समय के लिए बाहर आकर, आए हुए जनसमुदाय को सांत्वना रूप आश्वासन रूप सम्बोधन देते, परन्तु ऐसा न हुआ।


अगर कहीं उग्र प्रदर्शन चल रहा होता तो पूरा कारवां लेकर जाना पड़ता और कई दिनों तक फील्ड पर रहना पड़ता, परन्तु यहां तो शान्तिप्रियों द्वारा मौन एवं अहिंसक प्रदर्शन था शायद यही कारण रहा कि माननीय ने अपने कक्ष से बाहर आना उचित न समझा, माननीय का ऐसा व्यवहार यह इंगित करा रहा था कि उग्र प्रदर्शन करने वालों की बात ही कानून सुनता है-उनकी बात ही सुनी जाती है। ऐसा व्यवहार अगर किसी सामान्य व्यक्ति के द्वारा भी अपेक्षित नहीं है फिर आप तो सम्पूर्ण जिले के Law & Order को सम्हालने वाले हैं, आपका ऐसा व्यवहार पूर्णतः अनुचित है।
