रीवा में हुई घटना दुर्घटना नहीं, बल्कि अत्यंत जघन्य कृत्य एवं बहूत बड़ा अपराध है प्रमाण सागर महाराज 

धर्म

रीवा में हुई घटना दुर्घटना नहीं, बल्कि अत्यंत जघन्य कृत्य एवं बहूत बड़ा अपराध है प्रमाण सागर महाराज 

पारसनाथ 

दुर्घटनाएँ कभी-कभार होती हैं, लेकिन जिस प्रकार से रीवा मध्यप्रदेश में जैन साध्वियों को निर्दयता पूर्वक कुचला और उन्हें रौंदकर भाग गये, यह दुर्घटना नहीं, बल्कि अत्यंत जघन्य कृत्य एवं बहूत बड़ा अपराध है” उपरोक्त उदगार राष्ट्रीय संत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने मधुबन गुणायतन से प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष अनेक निर्दोष साधु-संतों पर इस प्रकार से प्रहार हो रहे हैं, जैन समाज सदैव अहिंसा और शांति का उपासक रहा है। अब तक समाज ने इन घटनाओं को दुर्घटना मानकर सीमित प्रतिक्रिया दी,परंतु “अब केवल प्रतिकार नहीं,वल्कि स्थायी समाधान आवश्यक है”मुनि श्री ने कहा कि यदि साधु-संतों के साथ ऐसी घटनाएँ होती रहीं तो उनके आहार/ विहार पर ही संकट खड़ा हो जाएगा। और यदि साधुओं का आवागमन रुक गया तो साधु-संस्कृति का प्रवाह भी बाधित होगा। मुनि श्री ने कहा कि साधु-संत समाज के मार्गदर्शक होते हैं, वे जहाँ जाते हैं वहाँ चेतना और आध्यात्मिकता का वातावरण निर्मित होता है। इसलिए उनका निर्बाध विहार सुरक्षित रहना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने कहा कि आज देश भर में बड़ी संख्या में समाजजन एकत्र होकर अपनी पीड़ा और आक्रोश को व्यक्त कर रहे हैं, यह समाज की जागरूकता का परिचायक है। परंतु ऐसी परिस्थिति उत्पन्न ही न हो, यह सुनिश्चित करना शासन -प्रशासन की जिम्मेदारी है। Hindi poster showing a seated guru with books and many bowls of snacks; bold red headline above promises tips or info (advertisement).Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.

 

 

सरकार को चाहिये कि पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा के लिए विशेष नियम और प्रावधान लागू किये जायें ज्ञापन में जो मांगें रखी गई हैं, उन पर सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

 

मुनिश्री ने कहा कि में मानता हुं कि केवल एक दिन की मौन रैली से सरकार की नींद नहीं खुलती। अक्सर कुछ दिनों तक प्रतिक्रियाएँ आती हैं और फिर विषय को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इसलिए समाज को भी तब तक शांत नहीं बैठना चाहिए जब तक कि इसका स्थायी समाधान प्राप्त न हो जाए। मुनिश्री ने समाज से भी सतर्कता और जिम्मेदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि साधु-संतों के विहार को हल्केपन से न लें संतों के विहार की प्रशासन को पूर्व सूचना देकर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए तथा स्वयंसेवकों को भी साधु-संतों के साथ रहकर सहयोग करना चाहिए।

 

 

 

 

 उन्होंने दुःख व्यक्त करते हुये कहा कि एक क्षण की लापरवाही से 20 वर्षों की तप-साधनारत आर्यिका श्रुतमति माताजी और आर्यिका उपशममति माताजी जैसी साधना-निष्ठ आर्यिकाओं का इस प्रकार चले जाना अत्यंत ही पीड़ादायक है। उपलब्ध वीडियो क्लिप्स को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस घटना के पीछे किसी साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।सरकार को इसकी गहन जांच कर दोषियों को सामने लाना चाहिए। 

 

 

 

मुनिश्री ने कहा कि साधु-संत तो अपने जीवन में आने वाले हर उपसर्ग को सहन कर लेते हैं,और उन्होंने अपने अंत समय को सम्हाल ही लिया होगा।

 

 

राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया संपूर्ण भारत में साधु संतों के आव्हान पर प्रातः8 बजे जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन भारत सरकार के राष्ट्रपति/ प्रधानमंत्री एवं मध्यप्रदेश शासन के मुख्यमंत्री/ राज्यपाल तथा अन्य संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्तीओं को ज्ञापन दिये गये इस अवसर पर मधुबन जैन समाज ने मौन रैली निकाल कर जिला प्रशासन को पांच सूत्रीय ज्ञापन दिया जिसमें गुणायतन के पदाधिकारियों के साथ सकल जैन समाज मधुवन के समस्त पदाधिकारी शामिल थे।उन्होंने जिला प्रशासन के माध्यम से पांच सूत्रीय ज्ञापन प्रस्तुत किया जिसमें पद विहारी साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा व्यवस्था, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति एवं आर्यिका माताजी दुर्घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच SIT से कराई जाए।

 

-घटना से संबंधित सभी CCTV, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएँ।

-दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए।

2. “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू किया जाए

विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय,

• संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग,

• ट्रैफिक नियंत्रण,

• चेतावनी संकेतक,

• हाईवे एवं भीड़भाड़ क्षेत्रों में विशेष सावधानी

सुनिश्चित की जाए।

3. “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाई जाए

भारत सरकार द्वारा:

• पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय गाईड लाईन जारी की जाऐ तथा उनकी सुरक्षा एवं संवेदनशील मार्गों पर विशेष प्रावधान निर्मित किए जाएँ। 4. संतों के विरुद्ध अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखाजाए

क्यों कि साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते,

• वाहन या सुरक्षा साधनों का उपयोग नहीं करते,

• तथा पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं।

5. प्रशासन एवं समाज के बीच समन्वय तंत्र बने

स्थानीय स्तर पर उसे लागू करें। इस अवसर पर जैन समाज के प्रमुखों ने कहा कि

जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।हमें पूर्ण विश्वास है कि प्रशासन इस अत्यन्त संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं प्रभावी कदम उठाएगा। प्रवक्ता अविनाश जैन ने कहा कि“संत सुरक्षा केवल एक समाज का विषय नहीं, भारत की आध्यात्मिक विरासत की सुरक्षा का प्रश्न है। कहा कि उपरोक्त घटना से सम्वंधित जो भी तथ्य निकल कर आये है,उसमें साफ नजर आ रहा है कि यह टक्कर जानबू झकर की गई जिससे आर्यिका माताऐं लहुलुहान हुई इसकी जांच होंना चाहिये और अपराधियों को कठोर डंड दिया जाये।

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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