“पुण्योदय का मंदिर ही कितना भव्य है जैसे दिव्य लोक में आ गये हो” : मुनि श्री 108 शाश्वत सागर जी महाराज
कोटा : दिनाक : 12 नवम्बर अष्टानिका पर्व व श्री इन्द्रध्वज मण्डल विधान के पाचवे दिन नसिया जी जैन मंदिर दादाबाड़ी कोटा में पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य चतुर्थ कालीन चर्या धारक मुनि श्री 108 शाश्वत सागर जी महाराज का आज एकादशी (ग्यारस) के अवसर पर प्रवचन में कहा कि पर के वश में रहना नरक है पर क्या है जो भी संसार में दिख रहा है वो पर है शरीर भी पर है इन्द्रिया भी पर है आचार्यो ने कहा है कि सुख छोडने में है, हम सब उल्टी मान्यताओं में चल रहे है हम जोडने में सुख मान रहे है परन्तु हम उल्टा ही सोचते है जितना भी ज्ञान है वो विवेक के अभाव में विपरीत कार्य करता है संसार में सुख दिखेगा पर वो सुखाभास है सुख कभी मिलेगा नहीं आप जितना जोडोगे उतना दुख का ही कारण होगा जितना त्याग करोगे उतना सुखी हो ओगे लेकिन विवेक के अभाव हम विपरीत मान्यताओं में ही अपना जीवन समाप्त कर रहे है हम बार-बार जन्म मरण क्यों कर रहे है इसका मुख्य कारण है लालसा, इच्छाए, हमारी इच्छाए जहर का काम करती है व्यक्ति एक दिन में 60 से 70 हजार विचार प्रतिदिन सोचता है पांच इन्द्रियों की लालसाओं में अपना जीवन नष्ट कर रहे हैI तीर्थकर, भगवान को भी सुख तभी मिलता है जब वो परिग्रह को त्यागते है हमे उल्टी मान्यताओं को सीधा करना है आत्मा को जानना है मोक्ष में आत्मा ही जा सकती है इस आत्मा के साथ अनन्त कर्मो का बंधन है इच्छाओं को जीत कर आत्मा के साथ बंधे कर्मों को छुडाना है हम प्राप्त तो कुछ ही कर पाते हैं पर इच्छाए अनन्त कर लेते है ये ही दुख का कारण होती है इच्छा निरोधः तपः इच्छा का निरोध करना अर्थात इच्छाओं को रोकना ही तप है तप से पुण्य बढ़ता है “पुण्य फला अर्हन्ता” पुण्य के फल से ही अरिहन्त (भगवान) पद मिलता है मोक्ष जाने के लिए भी पुण्य की आवश्यकता होती है पुण्य बढाओ तो आप के कार्य होते जाएगें प्रतिदिन भगवान की पुजन अभिषेक करने वाले की दुर्गती नहीं होती है भगवान का गुणगान उत्साह पूर्वक करो पूजन करने वाला ही पूज्य बनता है जो भगवान की पूजा करता है उसे दरिद्रता आ नहीं सकती।
आपका पुण्योदय का मंदिर कितना भव्य है दर्शन करते ही ऐसा
लगता है जैसे दिव्य लोक में आ गये हो ऐसे भगवान के यहा प्रतिदिन पूजन अभिषेक बडे भक्ति भाव से करने चाहिए संसार में निर्धनता और बीमारी सबसे बड़ा दुख का कारण है और भगवान की भक्ति से इन दुखों को दूर किया जा सकता है।
अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ ने बताया कि इस अवसर पर शान्तिधारा श्रीमति तारामणि टोंग्या, महावीर मित्तल, पार्थ,सागर, विवेक ठोरा परिवार व भक्तामर विधान राजेन्द्र हुकम काका परिवार द्वारा की गया।







प्रशासनिक मंत्री अशोक खादी व अर्चना जैन (रानी) सर्राफ ने बताया कि 108 इन्द्र-इंद्राणियों के द्वारा श्री इंद्रध्वज महामंडल, विधान में अचलमेरू और मंदरमेरू की 7 पूजा के माध्यम से इंद्र परिवारों द्वारा 80 आकर्षक ध्वजाये जिन चैत्यालयों पर चढ़ाई गई।
कोषाध्यक्ष मनीष जैन मोहिवाल ने बताया कि इस अवसर पर राजेन्द्र हरसोरा, महावीर इंद्रा जी बगडा पारस सुशीला गर्ग सोरभ निकिता सबदरा संतरा देवी आशा दीदी जी और कार्यकारणी व महिला मण्डल की अनेक महिलाये समाज जन उपस्थित थे।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
