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भाग्य भरोसे नहीं, कर्म की बदौलत चलती है श्रमण संस्कृतिः मुनि श्री सुधासागर महाराज

धर्म

भाग्य भरोसे नहीं, कर्म की बदौलत चलती है श्रमण संस्कृतिः मुनि श्री सुधासागर महाराज

अशोकनगर

श्रमण संस्कृति भाग्य भरोसे नहीं, बल्कि कर्म के सिद्धांत पर चलती है। किस्मत से धर्म नहीं चलता, कर्म से न धर्म चलता है। प्रकृति कभी भाग्य तो कभी कर्म के अधीन रूप बदलती है। अगर आप भाग्य के भरोसे बैठ गए, तो कर्म की कठपुतली बनकर रह जाएंगे। इसके विपरीत, कर्मवीर अपना रास्ता खुद बनाते हैं। यह प्रेरक उद्‌गार निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने सुभाषगंज मैदान में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

 

 

 

महाराज श्री ने बेहद सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए अध्यात्म और जैन दर्शन की गहराइयोंको समझाया। मुनि श्री ने कहा कि जैन और वैष्णव दोनों ही दर्शनों में माना गया है कि हरआत्मा में भगवान है। लेकिन व्यावहारिक जीवन में ऐसा नहीं चल सकता। उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा कि यदि पत्नी या बेटे की आत्मा में भगवान है, तो क्या आप उनकी पूजा करने लगेंगे? यदि पूजा करते समय बच्चे ने ‘शू-शू’ कर दी, तब आप क्या करेंगे?’Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.

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उन्होंने समझाया कि हर 6 महीने और 8 समय में 608 जीव मोक्ष जा रहे हैं। आप हर एक का नाम पता करके उनकी माला नहीं फेर सकते, इसीलिए जैन दर्शन में वीआईपी व्यवस्था यानी तीर्थंकरों की स्थापना की गई है, जो पूजनीय हैं। जिस तरह राजा का बल उसकी विशाल सेना और सीमाओं से आंका जाता है, वैसे ही तीर्थंकर की महिमा इससे समझ आती है कि करोड़ों देवता उनका जन्म कल्याणक मनाने धरती पर आते हैं।

 

 

बाल संस्कार शिविर का हुआ शंखनाद

इससे पहले मुनि श्री ससंघ के पावन सान्निध्य में मंगलाचरण और ध्वजारोहण के साथ श्रमण संस्कृति बाल संस्कार शिविर का भव्य शुभारंभहुआ। इस शिविर के माध्यम से नई पीढ़ी को जैन धर्म के मूल संस्कारों, नैतिक मूल्यों और अपनी प्राचीन संस्कृति से जोड़ा जाएगा।

 

आज बहेगी सम्मान की सरिता, कार्यकर्ताओं को मिलेंगे प्रशस्ति पत्र

सोमवार को मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के सान्निध्य में एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। जिसमें उन सभी समर्पित कार्यकर्ताओं, महिला मंडलों और सामाजिक संगठनों का बहुमान किया जाएगा, जिन्होंने श्री मद् जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव, विश्व शांति महायज्ञ और चातुर्मास के दौरान अपनी अनुकरणीय सेवाएं दी थीं। सभी सेवाभाविओं को मंच से विशेष प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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