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मेरे बिना तुम जी नहीं पाओगे… यह कहने का हक सिर्फ पैसों को है” — आचार्य प्रसन्न सागरजी का स्वदेशी और राष्ट्रहित पर बड़ा संदेश

धर्म

“मेरे बिना तुम जी नहीं पाओगे… यह कहने का हक सिर्फ पैसों को है” — आचार्य प्रसन्न सागरजी का स्वदेशी और राष्ट्रहित पर बड़ा संदेश

परतापुर, बांसवाड़ा (राजस्थान)।

आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने प्रभावशाली प्रवचन में राष्ट्रहित, स्वदेशी और आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर समाज को जागरूक करने वाला संदेश दिया। हजारों गुरु भक्तों की उपस्थिति में आचार्यश्री ने कहा कि “समय पर जो समझ जाते हैं, वही समझदारी से जीवन जी पाते हैं, अन्यथा जीवन का बोझ तो गधे भी ढो रहे हैं।”

 

 

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को केवल अपने स्वार्थ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देशहित, समाजहित और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए। आचार्यश्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को स्वदेशी वस्तुओं और भारतीय उत्पादों को अपनाना होगा।Hindi poster showing a seated guru with books and many bowls of snacks; bold red headline above promises tips or info (advertisement).Promotional poster for Navin Jain Print Gallery with Buddha statues, devotional pictures, and printing equipment; includes contact numbers and Hindi text.

प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने विदेशी कंपनियों और पेय पदार्थों पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि भारत के करोड़ों लोग प्रतिदिन विदेशी शीतल पेयों के बजाय गन्ने का रस, नारियल पानी और फलों के जूस जैसे भारतीय पेय पदार्थों का सेवन करें, तो हजारों करोड़ रुपये देश के भीतर ही रहेंगे और इसका सीधा लाभ किसानों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय रोजगार को मिलेगा।

 

उन्होंने कहा कि विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार से अरबों रुपये बाहर ले जा रही हैं, जबकि भारतीय किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में हर भारतीय का दायित्व है कि वह स्वदेशी अपनाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करे।

आचार्यश्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विदेशी चमक-दमक और विज्ञापनों के प्रभाव में आकर भारतीय संस्कृति और परंपराओं को भूलना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत राम, कृष्ण, बुद्ध और महावीर की पवित्र भूमि है, इसलिए यहां के लोगों को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

अपने उद्बोधन में उन्होंने योगगुरु बाबा रामदेव के “स्वदेशी अपनाओ, राष्ट्र को मजबूत बनाओ” संदेश का भी उल्लेख किया और कहा कि यदि भारतीय नागरिक केवल कुछ महीनों तक विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करें, तो देश आर्थिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

आचार्यश्री ने अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं से देशभक्ति और जन-जागरण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

मुख्य बिंदु

आचार्य प्रसन्न सागरजी का स्वदेशी अपनाने का आह्वान

विदेशी पेयों और उत्पादों के बहिष्कार पर जोर

किसानों और स्थानीय व्यापार को मजबूत करने की अपील

युवाओं को भारतीय संस्कृति से जुड़ने का संदेश

आत्मनिर्भर भारत निर्माण में सहभागिता का आह्वान

“स्वदेशी अपनाओ, राष्ट्र को मजबूत बनाओ” संदेश दोहराया

जानकारी स्रोत: नरेंद्र अजमेरा, पियुष कासलीवाल (औरंगाबाद)

संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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