नरक गति का चिंतन जरूर करना चाहिए आचार्य श्री विनिश्चय सागर

धर्म

नरक गति का चिंतन जरूर करना चाहिए आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने गुरुवार की बेला में नरक गति के दुखों के विषय में बताया उन्होंने कहा कि नरक गति का एक-एक पल भारी है हम एक सेकंड भी मच्छर काटने का कष्ट को सह नहीं पाते लेकिन नरको में जो कष्ट होता है वह हमारी सोच के बाहर है। उन्होंने कहा कि यदि नरक गति से दूर रहना है तो जैन दर्शन कहता है सावधान रहो फूंक फूंक कर कदम रखो ध्यान रखो किसी को कष्ट ना हो जाए पीड़ा ना हो जाए किसी को नुकसान ना हो जाए कदम कदम पर सावधानी रखो लेकिन इसमें सबसे बड़ी बाधा प्रमाद है। यह प्रमाद ऐसा छाता है कि हम सावधान होते-होते रुक जाते हैं और भाव बिगड़ जाते हैं और इसीलिए हम दुर्गति में फंस जाते हैं।

 

 

 

मंदिर में बैठे-बैठे नींद आ रही है। यह प्रमाद है क्रोध मान माया यह सब प्रमाद हैं। आप लोग मंदिर में व्यवहार निभा रहे हैं मंदिर व्यवहार निभाने के लिए नहीं है धर्म ध्यान के लिए है लेकिन लोग मंदिर में व्यवहार निभाते हैं। हमारे पास सावधानी नहीं है।

आचार्य श्री ने कहा कि प्रति क्षण प्रति समय नरक गति का चिंतन जरूर करना चाहिए ऐसे काम करें कि हम नरक ना जाएं। सभी दर्शन नरक को स्वीकार करते हैं कि नरक होता है चिंतन करना चाहिए कि वास्तविकता में नरक क्या है उन्होंने कहा कि नरक गति में सुख नहीं है वहां दुख ही दुख होता है। वहां सुख अनुभूति नहीं है।

कुछ पढ़ो ना पढ़ो कर्म सिद्धांत जरूर पढ़ना
आचार्य श्री ने कहा कि लोग नरक गति के दुखों के बारे में जानते हैं लेकिन आश्चर्य है कि लोग सावधान नहीं है। लड़ाई झगड़ा बैर भाव निंदा करना नरक का रास्ता है।

 

 

 
यह प्रयास करना चाहिए कि हम तिर्यच और नरक गति दो गतियों से बच जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पढ़ो ना पढ़ो कर्म सिद्धांत जरूर पढ़ना। समझ आएगा कि ऐसा करने से ऐसा होता है। लेकिन हमने तो सिद्धांत बना रखा है कि जो करना है अभी करना है। फिर मनुष्य पर्याय में तो आना ही नहीं है ना। थोड़ी सी समझदारी भव भव के कष्ट मिटाती है थोड़ी सी नासमझी भव भव के कष्ट के लिए तैयार कर देती है। जैन दर्शन कहता है समझदार हो जाओ। यदि समझदारी आएगी अच्छाई आएगी अच्छाई आएगी तो दुर्गति से बच जाओगे। हमारे परिणाम में गंदगी दो ही कारणों से आती है एक राग दूसरा द्वेष राग द्वेष की गंदगी हमारे अंदर अनंत गंदगियों को लाता है। पर्व के विषय में कहा कि पर्व हमारी समीक्षा के लिए होते हैं हमें निर्मल बनाने के लिए होते हैं। परिणाम में निर्मलता बनाने का प्रयास करो।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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