बदलती जीवनशैली ने मनुष्य को तेज तो किया, शांत नही संसाधन बढ़े, समय घटा… व्यस्त जीवन में धर्म से दूरी बढ़ी : आर्यिका स्वास्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
आधुनिक दौर में संसाधनों की बढ़ोतरी के साथ व्यक्ति का जीवन आसान जरूर हुआ है, लेकिन वह पहले से अधिक व्यस्त भी हो गया है। यही कारण है कि सुविधाएं बढ़ने के बावजूद लोगों के पास स्वयं और धर्म के लिए समय कम होता जा रहा है। यह बात रविवार को अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा में स्वस्ति भूषण माताजी ने कही।
माताजी ने कहा कि संसार में जितने संसाधन बढ़ते जा रहे हैं, उतना व्यक्ति व्यस्त होता जा रहा है। रहन-सहन, आचार-विचार, भोजन और पानी तक सब बदल गए हैं। समय के साथ भाषा में भी परिवर्तन आता गया है। माताजी ने कहा कि तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखा गया जैन धर्म का पहलाग्रंथ है। सूत्र एक होता है, लेकिन उसका विस्तार बहुत बड़ा होता है। 




उन्होंने कहा जैसे हिन्दुओं में गीता, ईसाइयों में बाइबिल और मुस्लिमों में कुरान प्रमुख ग्रंथ हैं, वैसे ही जैन धर्म में तत्वार्थ सूत्र प्रमुख ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि इस ग्रंथ में ध्यान लगाकर मन से स्वाध्याय किया जाए तो जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है। माताजी ने कहा कि पहले शास्त्र प्राकृत भाषा में लिखे जाते थे, फिर संस्कृत भाषा आई। संस्कृत भाषा में अपनत्व झलकता है। हिंदी भाषा सम्मान की भाषा है, जबकि अंग्रेजी औपचारिक भाषा है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
