सन्तान होना भाग्य की बात है, और..सन्तान से सुख मिलना सौभाग्य की बात है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
परतापुर बांसवाड़ा
राजस्थान अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने आज मातृत्व दिवस के उपलक्ष्य में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि मानवता के लिए सबसे गहरे और सुन्दर अर्थों में बच्चों द्वारा माँ को धन्यवाद देने का सबसे बड़ा दिन है। यूँ तो ज़िन्दगी भर धन्यवाद दो, तब भी कम है, लेकिन मातृत्व दिवस सबके लिए अत्यन्त विशेष दिन है।
मातृत्व दिवस नि:स्वार्थ प्रेम का, त्याग के सम्मान का और कृतज्ञता ज्ञापित करने का सुनहरा अवसर है। यह उस मौन तपस्या को पहचानने का दिन है, जो एक माँ अपने बच्चों की खुशी के लिए हर दिन करती है।

मातृत्व दिवस केवल अपनी जन्मदात्री माँ के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी मातृतुल्य महिलाओं के प्रति सम्मान और अभिनन्दन का दिन है, जिन्होंने हमारे पालन-पोषण में अपना प्रेम उड़ेला है। यह स्त्री-शक्ति और उसकी सृजन क्षमता का पर्वोत्सव है।




सच में —
_दवा असर न करे तो नज़र उतारती है,_
_बच्चा भोजन न करे तो मनुहार करती है,_
_बात न माने तो चाँटा भी मारती है,_
_और स्वयं गीले में सोकर बच्चे को सूखे में सुलाती है — यही माँ होती है।_
माँ, माँ है जनाब..
वह जल्दी हार कहाँ मानती है।
खुद जागकर बच्चे को सुलाती है,
खुद आँसू बहाकर बच्चे को हँसाती है। घर की हर मुसीबत को बाहर ही रोक देती है। माँ जब मुस्कुराती है, तो हर बला अपना रास्ता मोड़ लेती है। इसलिए —
सृष्टि का आधार है माँ,
ईश्वर का प्रतिरूप है माँ।
माँ सिर्फ एक शब्द नहीं, पूरी कायनात है माँ।
माँ की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है,
और माँ के चेहरे की प्रसन्नता ही सभी तीर्थों की यात्रा है…!!
! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
