अब तो बहिन को वो ही भाई-भाये..*जो बहिन के लिये-मन पसंद तोहफा लाये..!*अन्तर्मना प्रसन्न सागरजी महाराज/ (रक्षा बंधन विशेष)
कुलचाराम हैदराबाद
उत्सव के नाम पर बिक रहे हैं त्यौहार। भाई बहन के त्योहार भी अब व्यापार बन गये।* रक्षाबंधन के रंग में बाजार सजा हुआ है। पहले हम पंचांग देखकर पता करते थे, अब विज्ञापन बता देते हैं, कल कौन सा त्यौहार आने वाला है? *पहले हम अपनी परम्पराओं से त्यौहार निर्धारित करते थे, अब हमारी परम्पराओं का निर्धारण बाजार करता है।* इसलिए तो मिठाई की जगह अब चॉकलेट ने ले ली है।
बाजार ने त्यौहार का प्रोटोकॉल तय कर रखा है। तभी तो विज्ञापनों में तोहफ़ा नहीं–तो त्यौहार नहीं।
*आज के इस दौर में त्यौहार तय नहीं करते कि विज्ञापन क्या हो, बल्कि विज्ञापन तय करते हैं कि त्यौहार का स्वरूप क्या हो।* न्यूज पेपर के कार्टून में ये दर्शाते हैं कि भाई ने बहिन को गिफ्ट नहीं दिया, — तो बहिन भाई को बहुत गुस्से में राखी बाँध रही है। अब तो बहन रक्षा का वचन जैसे ना जाने, किस जमाने की बात हो। *अब तो बहिन को वही भाई भाये, जो बहन के लिए मन पसंद तोहफ़ा लेकर आये।* प्रेम का स्थान अब ब्रांडेड तोहफों ने ले लिया है।
गरीब आदमी रिश्ते तो निभा सकता है, मगर दिखा नहीं सकता। संसार में राजा, रंक, अमीर, गरीब, सन्त, फकीर कोई भी हो, ये सब प्रेम से ही जिन्दा है। *आज हमारे रिश्तों से प्रेम तो खत्म हो गया, और स्वार्थ भारी पड़ गया।* इसलिए मैं कहता हूँ- *रस ही कहाँ रहा रिश्तो में*। खून के रिश्तों में हजारों किलोमीटर की




दूरिया भी मायने नहीं रखती। अब तो मिन्टों–सैकन्डों में वीडीओ कॉल, व्हाटसएप कॉल कर दो और साक्षातकार कर लो।
*संसार का सबसे पवित्र रिश्ता यदि कोई रिश्ता है, तो वह है-भाई बहिन का रिश्ता।* तभी तो बहिन भाई के सामने कितनी ही सज धज के, सोलह श्रृंगार करके आ जाये, तब भी भाई के मन में किन्चित भी बहिन के प्रति काम-विकार-वासना का भाव नहीं आता है। और यदि कोई दूसरी सज धज कर आ जाये तो, *दिल में कुछ-कुछ होने लगता है।* इसलिए *राखी सिर्फ त्यौहार ही नहीं बल्कि प्रेम का पवित्र अनुष्ठान है…!!!*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
